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गंगा सफाई अभियान या नमामि गंगे मिशन में 3 शहर सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं: फर्रुखाबाद, मथुरा और पटना. इन तीनों ही शहरों से भारी मात्रा में सीवेज नदियों में प्रवाहित होता है. यह एक आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है कि इन शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की सुध दशकों से नहीं ली गयी थी. पिछले 3 वर्षों में कितनों का तो नवीनीकरण हुआ है और कहीं तो नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स स्थापित किये गए हैं. आइए एक एक कर के जानते हैं कि किस शहर में क्या व्यवस्था हुई है.
कपड़ा उद्योग के लिए जाने जाने वाले फर्रुखाबाद में भी माँ गंगा काशी की तरह अर्द्ध चंद्राकर बहती है. अतः फर्रुखाबाद में माँ गंगा का महत्व और भी बढ़ जाता है. यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है कि वहां का सीवेज प्लांट को दुरुस्त किया जाए. यह वहाँ के कचरे और सीवेज को सही मात्रा में निकालने के लिए पर्याप्त नहीं था. इसलिए अब फर्रुखाबाद में 3 बड़े नालों को टैप कर के नए STP में ले जाया जाएगा, जहाँ से वो फर्रुखाबाद में ही बने 2 MLD क्षमता के नए STP में भेजा जाएगा. पांचाल घाट का निर्माण भी उसी कार्य योजना का हिस्सा है जिसके अंतर्गत गंगा सफाई अभियान को दुरुस्त किया जाएगा. इसके साथ ही माँ गंगा के किनारे करीब 11 लाख पौधे लगाए गए हैं जो निकट भविष्य में वहाँ की मिट्टी को और पकड़ कर रखेंगे जिससे बाढ़ के भयावह खतरे को कम किया जा सकेगा. इसके साथ ही गंगा विचार मंच की भी स्थापना फर्रुखाबाद में की गई है जिसके अंर्तगत बच्चों में माँ गंगा के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके. यह भविष्य के लिए एक अच्छा कदम है.
बिहार की राजधानी पटना का भारतीय संस्कृति में एक बहुत पुराना और मज़बूत नाता रहा है. परंतु पौराणिक पाटलिपुत्र में गंगा घाट का 500 किलोमीटर तक का किनारा शहरीकरण के कारण दूषित हुआ जा रहा था. सीवेज की पूर्ण व्यवस्था न होने के कारण गंगा में साबुन से नहाने, कपड़े धोने, पशु नहलाने इत्यादि के कारण गंगा और भी दूषित हो रही थी. गंगा में नालों का अनट्रीटेड पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा था. अब यहाँ समग्र सीवेज की व्यवस्था की गई है. यह सब नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत हुआ है. इसमें 227 किलोमीटर ज़ोन के सीवेज को 60 MLD की क्षमता वाले सीवेज प्लांट से सही किया जाएगा. पहाड़ी, सैदपुर, करमाली, दीघा और कंकड़बाग में एक-एक सीवेज प्लांट भी प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत बादशाही नाले का पानी ट्रीट कर फूलपुर नदी में गिराया जाएगा ताकि किसानों को स्वच्छ पानी खेती के लिए मिल सके. इसके अंतर्गत 20 नए घाटों का निर्माण और पुराने घाटों का सुंदरीकरण/ नवीनीकरण भी होगा.
कृष्ण की भूमि मथुरा यमुना नदी के किनारे एक पौराणिक नगरी है. इसका पौराणिक काल से ही अपना महत्व है. परंतु बेहतर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स नहीं होने के कारण मथुरा में यमुना नदी का पानी लगातार दूषित हो रहा था. इसके लिए मसानी के 6.8 MLD क्षमता के STP का नवीनीकरण किया जा रहा है. साथ ही यहां 30 MLD क्षमता का नया STP भी बनाया जाएगा. लक्ष्मीनगर में 20 MLD क्षमता वाले 2 नए STP स्थापित होंगे. यमुना नदी में जाने वाला सीवेज अब गोकुल गैराज के रास्ते सीधे मथुरा रिफाइनरी जाएगा. यहां के लोगों को और जागरूक करने के लिए यमुना चौपाल और गंगा विचार मंच का भी श्री गणेश हुआ है. यमुना नदी की सतह को साफ करने के लिए ट्रैश स्कीमर्स की भी सहायता ली जा रही है.
ये तीनों ही शहर हमारी संस्कृति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. इनमें हो रहा काम नमामि गंगे की अब तक की स्थिति को बताता है. यह उस दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है जिसको लेकर 2014 में प्रधानमंत्री मोदी आये थे. निश्चित रूप से नितिन गडकरी ने भी बेहतर कार्य करके दिखाया है. यह प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ गंगा के सपने को साकार करेगा. जिस हिसाब से यहां काम चल रहा है और कुछ तो पूरे भी हो गए हैं, वो यह बताने के लिए काफी है कि सरकार की इच्छाशक्ति कितनी प्रबल है. देखना यह है कि अब यह कार्य कितना जल्दी पूर्ण होने वाला है.
निस्संदेह, नमामि गंगे योजना सफलता की ओर निरन्तर मजबूती से बढ़ रही है.
