बचपन से ही मन में यह भ्रांति बन गयी थी कि कुंभ बस कहने को हिन्दुओं के लिये बेहद पुण्य स्नान है, पर यह तमाम तरह की बदइंतज़ामी और अराजकता
बचपन से ही मन में यह भ्रांति बन गयी थी कि कुंभ बस कहने को हिन्दुओं के लिये बेहद पुण्य स्नान है, पर यह तमाम तरह की बदइंतज़ामी और अराजकता
कुम्भ महापर्व हिन्दू धर्म के प्राचीनतम पर्वों में से एक है. इस पर्व का उल्लेख वेदों ओर पुराणों में मिलता है. आध्यात्मिक उत्सव के रूप में कुम्भ का इतिहास काफी
ग्रह नक्षत्रों के विचरण के अनुसार, हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में सदियों से हर तीसरे वर्ष अर्ध या पूर्ण कुम्भ का आयोजन होता है. यह मूल रूप में बृहस्पति
मत्स्य पुराण में वर्णन है कि जब प्रलय आता है, युग का अंत होता है. पृथ्वी जलमग्न हो जाती है और सबकुछ डूब जाता है. उस समय भी चार वटवृक्ष