विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनावी कड़ाही चढ़ चुकी है. चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल जीत के ‘पकवान’ तलने में जुटे हुए हैं. कुछ पार्टियां अहंकार से
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनावी कड़ाही चढ़ चुकी है. चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल जीत के ‘पकवान’ तलने में जुटे हुए हैं. कुछ पार्टियां अहंकार से
लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं लेकिन राजनीतिक दलों की बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है. हालात ऐसे हैं कि नेताओं द्वारा हर रोज़ एक नया शिगूफा छोड़
“लोहिया ने नारा दिया था- पिछड़ा पावे सौ में साठ. यह नारा सामंतवादी शक्तियों के हित में हैं. मैं कहता हूँ पिछड़ा पावे सौ में नब्बे.” यह नारा देते हुए