Category: हास्य व्यंग्य

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मैं लेखक बनते बनते रह गया …

स्कूली परीक्षाओं में गाय व डाकिया पर निबंध लिखने के लिए मैं ‘निबंध माला’ से रट्टा मारता था. लेखक बनने की नैसर्गिक प्रतिभा मुझमे कितनी थी, इसी से समझा जा

चलो दिलदार चलो, चाँद के पार चलो…

सिवाय गीतकार के बाकी सब के लिए फ़िल्मी गीत सुनने के लिए होते हैं. उधर गाना बजा इधर आवाज़ कान तक पहुंची और हमने सुन लिया. मन में आया तो

युगपुरुष को निशान-ए-पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रॉक्सी वार को पूँछ से पकड़कर रगड़ दिया गया है । लोककल्याड मार्ग पर चलते हुए भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक्स में 40 से 200 के बीच जिहादियों

शोले को लाल सलाम

इतिहास किसी सटीक सहस्त्र कोणीय वीडियो पर आधारित नहीं होता. यह तथ्यों के अलावा इतिहासकार की कल्पना, कथा शैली, रुझान एवं पूर्वाग्रह आदि से मिलकर बनता है. फिल्मकार व कथाकार

सिंगिंग रियलटी शो

एक जमाना था जब परीक्षा का प्रश्नपत्र सेट करने वाले विद्वान् विद्यार्थियों को चैलेन्ज जैसा कुछ देते थे कि वे पोस्टमैन, मेरा गाँव, रेलयात्रा जैसे विषयों पर निबंध लिख कर

हिन्दी दिवस पर कवि सम्मेलन

14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। तरह-तरह के आयोजन होते है। प्रतियोगितायें भी। नारा प्रतियोगिता, काव्य प्रतियोगिता, टिप्पण लेखन। आदि-इत्यादि। वगैरह-वगैरह। एक्सेट्रा-वेक्सेट्रा! कुछ जगह तो सारा काम हिन्दी

वोट निंद्य है ।

वोट निंद्य है । वोट निंद्य बेशर्मराज पर कहो नीति अब क्या हो? कैसे वोटर रिझे आज फिर पांव तले तकिया हो? प्रतिपल मूर्ख वोटर को ठगता, मफ़लर-बद्ध चेहरा हो