स्कूली परीक्षाओं में गाय व डाकिया पर निबंध लिखने के लिए मैं ‘निबंध माला’ से रट्टा मारता था. लेखक बनने की नैसर्गिक प्रतिभा मुझमे कितनी थी, इसी से समझा जा
स्कूली परीक्षाओं में गाय व डाकिया पर निबंध लिखने के लिए मैं ‘निबंध माला’ से रट्टा मारता था. लेखक बनने की नैसर्गिक प्रतिभा मुझमे कितनी थी, इसी से समझा जा
सिवाय गीतकार के बाकी सब के लिए फ़िल्मी गीत सुनने के लिए होते हैं. उधर गाना बजा इधर आवाज़ कान तक पहुंची और हमने सुन लिया. मन में आया तो
पाकिस्तान के प्रॉक्सी वार को पूँछ से पकड़कर रगड़ दिया गया है । लोककल्याड मार्ग पर चलते हुए भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक्स में 40 से 200 के बीच जिहादियों
इतिहास किसी सटीक सहस्त्र कोणीय वीडियो पर आधारित नहीं होता. यह तथ्यों के अलावा इतिहासकार की कल्पना, कथा शैली, रुझान एवं पूर्वाग्रह आदि से मिलकर बनता है. फिल्मकार व कथाकार
एक जमाना था जब परीक्षा का प्रश्नपत्र सेट करने वाले विद्वान् विद्यार्थियों को चैलेन्ज जैसा कुछ देते थे कि वे पोस्टमैन, मेरा गाँव, रेलयात्रा जैसे विषयों पर निबंध लिख कर
चुनाव हुए और सरकार बदल गई । सरकार बदल गई तो काम करने का तरीका भी बदल गया । काम करने का तरीका बदला तो समस्याओं को सुलझाने का तरीका
वो भारत खंड -२ (वो भारत खंड -१ से आगे) दावात्याग – इस खंड का भी यथार्थ से किसी भी प्रकार का कोई वास्ता नहीं है । यह भीे उसी
जुमले भी साकार होते है । बस उन्हे देखने वाली नजर होनी चाहिए । मेरी नजर तेज है । इस उम्र में भी मुझे चश्मे की जरुरत नहीं पड़ी और
14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। तरह-तरह के आयोजन होते है। प्रतियोगितायें भी। नारा प्रतियोगिता, काव्य प्रतियोगिता, टिप्पण लेखन। आदि-इत्यादि। वगैरह-वगैरह। एक्सेट्रा-वेक्सेट्रा! कुछ जगह तो सारा काम हिन्दी
वोट निंद्य है । वोट निंद्य बेशर्मराज पर कहो नीति अब क्या हो? कैसे वोटर रिझे आज फिर पांव तले तकिया हो? प्रतिपल मूर्ख वोटर को ठगता, मफ़लर-बद्ध चेहरा हो