दत्ताजी सिंधिया को पेशवा बालाजी बाजीराव ‘ईश्वरचा सिपाही’ कहते थे. एक ऐसा योद्धा जो देवताओं की तरह लड़ता था और शत्रु दल पर दावानल बनकर टूट पड़ता था. रघुनाथ
दत्ताजी सिंधिया को पेशवा बालाजी बाजीराव ‘ईश्वरचा सिपाही’ कहते थे. एक ऐसा योद्धा जो देवताओं की तरह लड़ता था और शत्रु दल पर दावानल बनकर टूट पड़ता था. रघुनाथ
अरे, आपको मंदिर चाहिए कि विकास? विकास के पथ पर मंदिर कहाँ आते हैं? ये तो बस मंदिर पर वोट बटोरने आये हैं. ये देश तोड़ेंगे. जातिवादी…सावरकर के फॉलोवर्स…अंग्रेजों
अंतिम लड़ाई का बिगुल फूँक दिया गया था. जस्टिस खेहर ने कहा कि हम 5 दिसंबर को यह मामला सुनेंगे. 5 दिसंबर को क्या हुआ, 2 मिनट में क्या निर्णय
अब ज़मीन के नीचे की लड़ाई शुरू हुई. आजकल ऐसी तकनीक है कि ज़मीन के नीचे भी फोटोग्राफी संभव है. इसका प्रयोग मेट्रो निर्माण में उसका रुट तय करने
गतांक से आगे … ताला खुलवाने की लड़ाई जीती जा चुकी थी. अब संघर्ष कानूनी रुप से यह सिद्ध करने का था कि वहाँ एक मंदिर पहले से ही था.
यह पूरी कहानी शुरू होती है पानीपत के युद्ध के बाद 1528 ई० में जब बाबर के सेनापति ने अयोध्या की उस जमीन पर बने मंदिर को तोपों से उड़ा