लोकतंत के काहे कोसीं नेताजी के काहे खोबसीं सिस्टम के हम काहे भकोंसी जब हमहीं बनडमरु बानी हम तs सुतिया भोटर बानी ई हमके पकठाइल कहलन अउर ऊ मेहराइल कहलन
लोकतंत के काहे कोसीं नेताजी के काहे खोबसीं सिस्टम के हम काहे भकोंसी जब हमहीं बनडमरु बानी हम तs सुतिया भोटर बानी ई हमके पकठाइल कहलन अउर ऊ मेहराइल कहलन
कई लोग तो ज्योतिष को भी विद्या मानने को तैयार नहीं, कुछ तो विज्ञान की वैज्ञानिकता पर ही सवाल उठा देते हैं. मैं उदार हूँ. मैं सेफोलॉजी को भी
पंथ या विचार की सेवा करना सद्कर्म है, स्वयंसेवा के लिए प्रवृत्त होना पुण्य. आइआइटी मुम्बई के छात्र रहे रहे और संप्रति एक कंपनी के सीएमओ अनुराग दीक्षित (@bhootnath) ने
पाँच में चुनावी धूमगज्जर जारी है. चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों व पार्टियों द्वारा मतलोलुपता में जाने-अनजाने किए जा रहे हास-परिहास एवं प्रहसन की खबरों से मतदाताओ का ही नहीं
विश्व शांति के चतुर्दिक महिमामंडन के बीच विश्व बिरादरी युद्धवादियों व युद्धप्रेमियों की कराह भी सुने. दूसरा विश्वयुद्ध हुए दशकों बीत गये हैं. पूरी दुनिया को दो फाड़ करता हुआ
दिल्ली दरबार की होली सभा में राष्ट्रऋषि अपने सिंहासन पर विराजमान हैं. उनके नीचे की अति आरामदेह, आरामदेह और सामान्य कुर्सियों पर पदानुरुप मंत्री, संतरी और यंत्री बैठे हुए हैं.
दिन भर आकाशवाणी से क्रिेकेट का आँखों देखा हाल सुनते मेरे पिताजी ने ही मेरे मन में क्रिकेट के प्रति प्रेम जगाया. बॉल बाई बॉल रोमांच से अनभिज्ञ मेरे नानाजी
दिल्ली मेट्रो रेल का फैला जाल राष्ट्रमंडल खेलों से दिल्ली की आधारभूत संरचना में हुए बदलावों का एक पैमाना है. इस दौरान हुए घोटालों को कोसने वालों को मैं लोकतंत्र
भारत एक चुनाव प्रधान देश है. एक चुनाव जाता नहीं कि दूसरा आ धमकता है. जल्दी-जल्दी चुनाव होने के अनेक फायदे हैं. इससे लोकतंत्र में जड़ता नहीं आती. मतदाता खुद
गांधी से कहके हम तो भागे, कदम टिकते नहीं साहब के आगे रंज लीडर को बहुत है मगर हार के बाद कुछ ऐसा ही हुआ महसूस हुआ रिकार्ड तोड़ जुमलों,