मेढ़कों को तराजू के दो पलड़ों पर रखकर आप भले ही तौल लें पर चुनावी मौसम में माननीयों का लोकतंत्रीय उछल-कूद (मने दलबदल) रोकना लगभग असंभव है. माननीयों के उछल-कूद
मेढ़कों को तराजू के दो पलड़ों पर रखकर आप भले ही तौल लें पर चुनावी मौसम में माननीयों का लोकतंत्रीय उछल-कूद (मने दलबदल) रोकना लगभग असंभव है. माननीयों के उछल-कूद
हम बनना कुछ और चाहते हैं, बन कुछ और जाते हैं. हम ड्रीम पालते हैं, पैशन को सेलिब्रेट करते हैं पर दाल रोटी के लिए कहीं और ही टँग जाते
भगवान श्री राम का पिछले १५ दिनो से कोई अता-पता नहीं था। अयोध्या में सभी लोग बहुत चिंतित थे। भगवान श्री राम बिना किसी को बताये इतने दिन के लिए
रविवार की एक दोपहर अचानक पंड़ित जी याद आ गये और उनकी स्मृति में मैं एक शब्द चित्र बनाने लगा. यकीन करिए – यहाँ वर्णित घटनाएँ घटित हैं, रचित नहीं.
सत्रह ताबूत श्रीनगर से देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे गए । पूरे सैनिक सम्मान के साथ विभिन्न स्थानों पर सत्रह अंत्येष्ठियां हुईं, सत्रह बार सैन्य तुरुही बजाने वालों ने