राहुल को सहयोगियों ने कहा पप्पू

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने की जैसे ही खबरें आना शुरू हुई थीं, वैसे ही राहुल पर छींटाकशी करना शुरू कर दिया गया था. कुछ नेताओं ने अमेठी छोड़कर वायनाड जाने पर राहुल को रणछोड़ तक बताया था. लेकिन अब कांग्रेस के सहयोगी दल ने ही उन्हें ‘पप्पू’ बता दिया है.

गांधी परिवार ने ही अमेठी पर मुख्य रूप से ‘राज’ किया है, लेकिन विकास के नाम पर अमेठी में मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. हालात इतने बदतर हैं कि कुछ गांवों में अब तक सड़कें भी नहीं बन सकीं हैं किन्तु अब जबकि राहुल की अमेठी की लड़ाई में मुश्किल हो सकती है तो वह दूसरी सीट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को स्मृति ईरानी से कड़ी टककर मिली थी. इस बार भी भाजपा ने स्मृति ईरानी को ही अमेठी से प्रत्याशी घोषित किया है. अमेठी में विकास कार्य कम ही हुए हैं, अमेठी की जनता कांग्रेस व उसके अध्यक्ष राहुल की हक़ीक़त जान चुकी है, इसलिए इस बार राहुल के लिए अमेठी जीतना आसान नहीं है. यही कारण है कि राहुल ने वायनाड से भी चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है.

एक ओर जहां बीजेपी खुलेतौर पर राहुल के इस फैसले को डर बता रही है, वहीं सीपीएम ने इसे वामपंथ बनाम कांग्रेस करार देते हुए दो टूक कहा है कि पार्टी राहुल गांधी को इस सीट पर हराने की पूरी कोशिश करेगी. वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता प्रकाश करात ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला दिखाता है कि वे केरल में लेफ्ट के खिलाफ लड़ना चाहते हैं. इससे भाजपा को ही फायदा होगा.

यदि बात राजनीतिक लाभ या नुकसान तक सीमित होती तो ठीक था, लेकिन चुनाव में जुबानी जंग न हो तो शायद राजनीतिक दल चुनाव को चुनाव मानते ही नहीं हैं. राहुल के वायनाड सीट से चुनाव लड़ने पर सीपीआईएम के मुखपत्र देशाभिमानी टूडे में राहुल गांधी को पप्पू बताया गया है. पेपर में ये लिखा गया है कि वायनाड से राहुल गांधी का चुनाव लड़ना तो पप्पू स्ट्राइक है.

सनद रहे जहां भी सीपीएम चुनाव लड़ रही है, वहां कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन है लेकिन केरल में दोनों दलों का गठबंधन नहीं हो सका था. इसका मतलब यह है कि सीपीएम व कांग्रेस आखिर सहयोगी तो हैं ही और जब सहयोगी दल ही राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहकर संबोधित करेंगें तो अन्य विरोधी दलों से क्या उम्मीद की जा सकती है.

दरअसल राजनीतिक दलों में ‘जुबानी जंग’ की परंपरा पुरानी रही है, किन्तु शब्दों का ध्यान रखकर यदि बातें कहीं जाएं तो उचित होगा. गौरतलब है कि हाल ही में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राहुल गांधी को बच्चा बताया था. 

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही है. सभी राजनीतिक दलों को पता है कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति कितनी दयनीय है. अतः सभी विपक्षी दल कांग्रेस पर विपक्ष की एकता को कमज़ोर करने का आरोप भी लगा रहे हैं. इस कड़ी में दिल्ली में केजरीवाल की पार्टी आप व केरल में वामपंथी पार्टियों के नाम शामिल हैं.