फेसबुक पे चुनाव के समय हुई अनैतिक गतिविधियों की खबरें अमेरिका के पिछले चुनावों के समय भी आई थी. आज ही फेसबुक ने 1100 से अधिक पेजेस, एकाउंट और ग्रुप्स के पेजेस हटा दिए. यह सभी फेसबुक के कोड और कंडक्ट को वायलेट कर रहे थे. फेसबुक का कहना है कि चुनावों को मद्देनजर रखते हुए ऐसा किया जा रहा है.
फेसबुक ने कहा कि हमने 687 पेज और एकाउंट रिमूव कर दिए हैं, जिनमें से ज़्यादातर को हमारे ऑटोमेटिड सिस्टमों ने डिटेक्ट कर सस्पेंड कर रखा था. ये एकाउंट और पेज भारत में ‘को-ऑर्डिनेटिड इनऑथन्टिक बिहेवियर’ में लिप्त थे तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के IT सेल से जुड़े लोगों के थे.
फेसबुक केे मुताबित इन पेजों के एडमिन तथा एकाउंट होल्डरों ने स्थानीय ख़बरें तथा राजनैतिक मुद्दों से पोस्ट डालीं, इन पेजेस पर चुनावी पार्टियों और लोकल खबरों की चर्चा की जाती थी जिसमें फेक न्यूज ज्यादा होती थी. रिव्यू में पाया गया कि ये एकाउंट और पेज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के IT सेल से जुड़े लोगों के थे.
भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा 30 करोड़ फेसबुक यूजर हैं। फेसबुक का कहना है कि उन्होंने अपनी जांच में पाया है कि लोगों ने फेक अकाउंट्स बनाकर कई ग्रुप्स से जुड़कर कॉन्टेंट को फैलाया और लोगों के बीच खबरें फैलाई। फेसबुक ने कहा कि इन फेक पन्नों में लोकल न्यूज के अलावा मुख्य विपक्षी दल बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना भी की जाती थी।
फेसबुक के साइबर सिक्यॉरिटी पॉलिसी के हेड नाथनेल ग्लेचियर ने कहा, ‘लोगों ने अपनी पहचान को छिपाकर यह काम करने का प्रयास किया, लेकिन हमने अपनी जांच में पाया कि ऐसे पन्ने कांग्रेस की आईटी सेल के लोगों से जुड़े थे।’ उन्होंने कहा कि इन अकाउंट्स को कॉन्टेंट नहीं बल्कि अप्रमाणिक व्यवहार के चलते हटाया जा रहा है।
केवल कांग्रेस के फेसबुक पेज ही नहीं पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग से जुड़े 103 पन्नों को भी हटाने का फैसला लिया है। खास बात यह है कि यह है कि यह पेज कश्मीर में सेपरेटिस्ट एजेंडा बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे पर इनका संचालन पाकिस्तान से किया जा रहा था। दुनिया भर की कई अथॉरिटीज ने फेसबुक पर राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी जानकारियां फैलाने वाले अकाउंट्स पर ऐक्शन लेने का दबाव बनाया था.
गौरतलब है कि पिछले साल ही अमेरिका में फेसबुक के CEO को डाटा लीक होने के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा था. उसके बाद ज़करबर्ग ने डेटा लीक मामले में अमेरिकी सीनेट के सामने पेश होकर माफ़ी मांगी और फेसबुक के जरिए हुई गड़बड़ियां स्वीकारीं. उन्होंने भारत में आगामी चुनाव में ईमानदारी बरतने की बात कही. शायद इसी के चलते यह कदम उठाया गया है. यह बात छुपी नहीं है कि ज़्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लेफ्ट लीनिंग हैं.
