बे सर पैर के टॉपिक पर रिसर्च के लिए सरकार क्यों स्कॉलर्शिप दे?

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 13 मार्च को सर्कुलर जारी करके कहा था कि शोध कर रहे छात्र राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर ध्यान दें. इसे लागू करने वाला सबसे पहला विश्वविद्यालय था केरल यूनिवसिर्टी. इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा था कि अक्सर छात्र ऐसे टॉपिक्स पर पीएचडी करना चाहते हैं जिनका कोई महत्व नहीं है या फिर ऐसे टॉपिक लाते हैं जिन पर पहले भी रिसर्च हो चुकी है.

इस फैसले से नाराज़ केरल में अंग्रेज़ी की एक शिक्षिका ने त्याग पत्र दे दिया. त्यागपत्र देने वाली शिक्षिका टीना पिल्लई का कहना है कि इस तरह के नियम बना कर छात्रों के टॉपिक चुनने की आज़ादी छीनी जा रही है. उनके इस फैसले को राजनीतिक बताया जा रहा है. कुछ और शिक्षक गण इसे दलित विरोधी होने का रंग दे रहे हैं. उनका मानना है कि लोगों को पसंद नहीं आता कि कोई छात्र अम्बेडकर पर पीएचडी करे.

त्यागपत्र और दलित विरोध सब बातें एक तरफ, अब हम वो बताते हैं जो मीडिया नहीं बताइएगा.

  • पीएचडी वाले नियम प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप जिसके अंतर्गत IIT, IISc, IISER, NIT, IIIT कॉलेजेस आते हैं, उनके लिए थे. इसमे लगभग सेंट्रल यूनिवर्सिटी आती ही नहीं है, फिर भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ने त्यागपत्र दे दिया.
  • यदि मंत्रालय ने राष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही है तो आखिर उसमें गलत क्या है?
  • HRD की नेशनल कमिटी में ऊंचे ऊंचे पद और बड़ी संस्थाओं के डायरेक्टर बैठते हैं. उन्हें इन मामलों की समझ सबसे ज़्यादा होगी. फिर भी एक अंग्रेज़ी की शिक्षिका ने इसे गलत ठहरा के त्यागपत्र क्यों दे दिया? वो शिक्षिका जो इस फेलोशिप के अन्तर्गत आती ही नहीं है. जो इससे प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें इस सर्कुलर से कोई दिक्कत नहीं है.
  • इस पीएचडी के लिए 7 साल में 1650 करोड़, 3000 छात्रों के लिए दिए जाएंगे. इन्हे 2 लाख सालाना और 8 लाख पूरी पीएचडी के दौरान मिलेंगे. सरकार अगर इतना पैसा खर्च कर रही है तो आप चाहते हैं कि वह इतनी दखलंदाजी भी नहीं करे कि राष्ट्र से जुड़े टॉपिक को प्राथमिकता दी जाए.

राष्ट्रीय प्रथमिकता के मानक हैं: ऊर्जा, पानी, साफ जलवायु, स्मार्ट मटेरियल, जनसाधारण का विकास. स्कीम केवल विज्ञान और टेक्निकल के छात्रों के लिए है, ऐसे में इंग्लिश की शिक्षिका का इसका विरोध करना बेतुका है.

अब महाज्ञानी प्रधानमंत्री के स्व-प्रमाणित बुद्धिमान मंत्री देश के बुद्धिजीवियों को बताएंगे कि उन्हें अपना काम कैसे करना…

Posted by Rahul Gandhi on Sunday, March 24, 2019

इस ड्रामे से असल निष्कर्ष ये निकला कि एस्केप वेलोसिटी वाले राहुल गांधी जी ने भी इस बात को लेकर प्रकाश जावड़ेकर पर तंज कस दिया. उन्होंने लिखा कि Wise Minister अब देश के ज्ञानी लोगों को बताएंगे कि उन्हें किस विषय पर पीएचडी करनी चाहिए.

न मीडिया इस पर प्रकाश डालेगा कि नियमों में गलत क्या है और न ही ये पूछा जाएगा कि इन सब में एक अंग्रेजी शिक्षिका के विरोध का क्या अर्थ है.


दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

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10 Comments

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