किंग्स इलेवन पंजाब ने कल रात राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल में 14 रनों से हरा दिया। पर हार या जीत से ज्यादा राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज जोस बटलर का विकेट चर्चा का विषय बन गया है. जोस बटलर को अश्विन “मांकडिंग” ढंग से रन आउट करके विवाद में फंस गए हैं.
जब गेंदबाज को लगता है कि नॉन-स्ट्राइकर छोर का बल्लेबाज़ क्रीज से गेंद डाले जाने से पहले से ही बाहर निकल रहा है तो वह नॉन-स्ट्राइकर छोर के स्टंप्स गिराकर नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज को रन आउट कर सकता है. इसमें गेंद रेकॉर्ड नहीं होती लेकिन विकेट गिर जाता है. इस तरह रन आउट करने का सब से प्रख्यात उदाहरण है भारतीय आल राउंडर वीनू मांकड़ का ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ बिल ब्राउन को 1947 मैं रन आउट करना, तब से इस रन आउट को मांकडिंग के नाम से जाना जाता है. मांकडिंग रन आउट नियमानुसार होने के बावजूद हमेशा ही विवादित रहा है। कई लोग इसको खेल भावना के विपरीत मानते हैं.
जयपुर के राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के मैच के 13 वें ओवर की आख़िरी गेंद फेंकते समय अश्विन ने देखा कि जोस बटलर क्रीज़ से बाहर निकल रहें हैं और मौके का फायदा उठाकर उन्होंने बटलर को रन आउट कर दिया. उसके बाद बटलर और अश्विन के बीच तीख़ी बातों का आदान प्रदान भी हुआ. तब से अश्विन की चारों तरफ़ से कड़ी निंदा हो रही है. कुछ लोग अश्विन के इस कदम को खेल भावना के विपरीत बता रहें हैं तो कुछ तो अश्विन को cheater तक बोल रहें हैं.
आलोचकों का कहना है कि अश्विन को आउट करने से पहले एक बार जोस बटलर को चेतावनी देनी चाहिए थी. जोस बटलर अनुभवी खिलाड़ी है उनको पता होना चाहिये कि बॉलर के गेंद फेंकने से पहले उनको क्रीज़ के अंदर ही रहना चाहिये. और बटलर ने पहली बार ऐसा नहीं किया है, 2014 में श्रीलंका के सचित्रा सेनानायके से इसी तरह मांकडिंग से रन आउट हो चुके हैं.
एक वर्ग कह रहा है कि अश्विन ने अपना बोलिंग रन-उप पूरा कर लिया था और उन्होंने बटलर के क्रीज़ के बाहर जाने का इंतेज़ार किया और जैसे ही वो बाहर निकले गिल्लियां उड़ा दी और वो छल है. अश्विन की अपील के बाद निर्णय तीसरे अंपायर को लेना था अगर अश्विन ने किसी नियम का उल्लंघन किया होता तो बटलर आउट करार नहीं दिए जाते.
कुछ समय पहले अश्विन से ट्विटर पर किसी ने मांकडिंग के बारे में राय पूछी थी, तब अश्विन ने कहा था अगर बॉलर लाइन क्रॉस नहीं कर सकता तो बल्लेबाजों को क्यों यह सहलियत मिलनी चाहिए.
ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट मैच में जब हार और जीत में केवल चंद रन का अंतर होता है तब बल्लेबाज को समय से पहले क्रीज़ से बाहर निकल कर तेज़ रन चुराने की सहूलियत तो गलत है. खेल में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है जीत. अगर अश्विन ने खेल के नियमों के दायरे में रहकर ही अपनी टीम की जीत के लिए कदम उठाया है तब छल और खेलभावना के विपरीत होने की आलोचना बैमानी लगती है.
दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

2 Comments
Theek Kiya aise hi hota hein logo Ka toh bolne Ka kam hein…Modi hi ko hi Leo unhone itna Accha kam Kiya fir bhi Modi hi ko Kuch log Bolte hi hein….
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