19 अप्रैल 1995 को मैकआर्थर व्हीलर ने अमरीका के दो बैंको को दिन दहाड़े लूट लिया. साढ़े पांच फ़ीट लम्बे और करीब 110 किलो के व्हीलर ने अपना चेहरा नहीं छुपाया था; चेहरे पर कोई कपड़ा या मुखौटा नहीं पहना था. कैमरे ने रिकॉर्ड कर लिया कि उसने बैंक के कर्मचारी को पिस्तौल दिखाई और पैसा लूट के आराम से टहलता हुआ बाहर निकल गया.
मध्य रात्रि को पुलिस ने उसके घर का दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खोलने पर व्हीलर ने पुलिस को देखा और उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. प्रतिवाद करते हुए उसने कहा, “लेकिन मैंने जूस लेपा हुआ था!“
व्हीलर ने पुलिस को बताया कि उसने अपने आप को सुरक्षा कैमरों से अदृश्य बनाने के लिए अपने चेहरे पर नींबू का रस मला था. पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि वह छलावे का शिकार नहीं था, न ही वह ड्रग्स पर था – बस एक बेवकूफ की तरह गलत था.
व्हीलर को पता था कि नींबू का जूस एक अदृश्य स्याही के रूप में उपयोग किया जाता है. अतः उसे लगा कि वही नींबू का रस उनके चेहरे को कैमरों के समक्ष अदृश्य बना देगा. डकैती के पहले व्हीलर ने इसको टेस्ट भी किया. उसने चेहरे पर रस पोता और कैमरे से एक सेल्फी खींची. फोटो में कोई चेहरा नहीं था! व्हीलर ने अपनी योजना में एक समस्या बतायी. नींबू के रस ने उसकी आँखों को इतनी बुरी तरह से कष्ट दिया कि वह मुश्किल से देख पा रहा था.
व्हीलर जेल चला गया और उसे दुनिया के सबसे मूर्ख अपराधियों की सूची में नाम शामिल होने का गौरव मिला. भारत में भी व्हीलर को चुनौती देने वाले लोग मौजूद है. प्रियंका का ही उदाहरण ले लीजिये. उन्होंने शीशे के सामने अपने आप को देखा और पाया कि उनकी नाक दादी की नाक से मिलती है. प्रयोग के रूप में उन्होंने दरबारी पत्रकारों की राय मांगी. सबने चेहरे की आरती उतारते हुए कहा, “बिलकुल,आप की नाक दादी की नाक से मिलती है.“
बस, उस नाक के सहारे वह नरेंद्र मोदी के वोटो में सेंध लगाने के लिए निकल पड़ीं.
लेकिन, देश के बाकी चौकीदारों ने तुरंत पकड़ लिया कि वह नाक दादी से नहीं, बल्कि ठग्गू मामा से मिलती है. उनसे मिलने भी कोई नहीं आ रहा है बल्कि, सभी चौकीदार उनकी करतूतों का हिसाब मांग रहे है.वह और उनके दरबारी आश्चर्य से भरे हुए है. प्रतिवाद करते हुए वे कह रहे है, “लेकिन नाक तो दादी पर गयी है!“
यह तो कहा ही जा सकता है कि ऐसे लोग न केवल छलावे का शिकार है, बल्कि ड्रग्स पर भी है, और साथ ही ये बेवकूफ भी हैं!
दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

5 Comments
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