लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. सभी पार्टियों ने अपने-अपने स्टार प्रचारकों व कार्यकर्ताओं को युद्ध स्तर पर कार्य करने का आदेश दे दिया है. सभी पार्टियां एक-एक सीट पर जोर लगा रही हैं. भारत का सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में 2014 में भाजपा ने मोदी लहर में 42.3 फ़ीसदी वोट के साथ 71 सीटें हासिल की थी. इसी कारण आज सभी पार्टियों ने उत्तरप्रदेश में नई योजना के तहत काम करना शुरू किया है.
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोमवार से उत्तर प्रदेश में अपने चुनाव अभियान के दूसरी कड़ी की शुरूआत की. प्रियंका ने यह अभियान गंगा की लहरों को ‘सारथी’ बनाकर नाव पर सवार होकर प्रयागराज से शुरू किया है, जो प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक चलेगा. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर प्रियंका के प्रयागराज से वाराणसी नदी मार्ग द्वारा मोटरबोट से सफर करने की अनुमति भी मांगी, जिसे चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी.
गौरतलब है कि 23 जनवरी को कांग्रेस की महासचिव-प्रभारी नियुक्त होने के बाद से प्रियंका पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से लगातार मुलाकात कर रही हैं. प्रियंका के सामने उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की चुनौती है. इस चुनौती को कांग्रेस के पूर्व सहयोगी दलों ने और भी कठिन कर दिया है.
अपनी इस यात्रा से पहले प्रियंका गांधी ने जनता के नाम एक खुला खत लिखा है. इस ख़त में उन्होंने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुझे पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी दी है. यूपी के लोगों से मेरा नाता बहुत पुराना है और आज सबके साथ मिलकर यूपी की राजनीति बदलने की जिम्मेदारी मुझे एक सिपाही के रूप में मिली है.
प्रियंका गांधी वाड्रा की गंगा यात्रा सोमवार 18 मार्च से आरंभ हो 20 मार्च तक चलेगी. इस दौरान वे नाव से 140 किलोमीटर का सफर तय करेंगी. प्रियंका की इस यात्रा के दौरान पूर्व भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले भी उनके साथ हैं. सावित्री बाई भाजपा से नाता तोड़ चुकी हैं. इस सफर के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा गंगा नदी किनारे बसे गांवों का लोगों से बातचीत भी करेंगी. मीडिया खबरों के अनुसार उनकी इस यात्रा के रास्ते में अधिकांश जगहों पर उन्हें ‘गंगा की बेटी’ बताने वाले पोस्टर लगे देखे गए हैं. इस यात्रा से पूर्व पूर्व प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रयागराज स्थित एक बड़े हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की. हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद प्रिंयका गांधी त्रिवेणी संगम पहुंचीं जहां उन्होंने गंगा पूजा की.
ज्ञात हो कि चुनावी माहौल में गंगा को प्रतीक बनाना नया ट्रेंड नहीं है. इससे पूर्व 2014 के लोकसभा चुनाव में भी श्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में कहा था कि मैं आया नहीं हूं, मुझे मां गंगा ने बुलाया है. नरेंद्र मोदी के इस बयान का सकारात्मक असर यह हुआ था कि वह पूर्वांचल के मतदाताओं को अपने आप से जोड़ने में कामयाब हुए थे. उसी नक्शेकदम पर चलते हुए उत्तरप्रदेश में जनाधार खो चुकी कांग्रेस को यकीन है कि गंगा यात्रा के जरिए वो लोगों के करीब आ सकेगी. मुमकिन है कि प्रियंका इस दौरान गंगा सफाई का मुद्दा भी उठाएं क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा गंगा की सफाई का वादा किया गया था, जिसे बहुत हद तक पूरा किया गया है.
इन सबके बीच यक्ष प्रश्न यह है कि प्रियंका गांधी के क्रेडेंशियल क्या हैं जो वह हिन्दू आस्था की प्रतीक गंगा को केन्द्र में रखकर राजनीति कर सकें. यही ना कि वह राहुल गांधी की बहन हैं जो एक आतंकी को मसूद अजहर जी कहते हैं और सुविधानुसार कभी जनेऊधारी ब्राह्मण बन जाते हैं, या यह कि वह सोनिया गांधी की पुत्री हैं जिनका हिन्दू सरोकार नगण्य है या यह कि वह राजीव गांधी की बेटी हैं जो प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कभी द्वंद्व से बाहर नहीं निकल सके कि वह धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करेंगे या हिन्दूत्व की? दो नावों पर सवारी करते हुए ही कांग्रेस इस हाल में पहुँची है. आगे आगे देखिए होता है क्या …
दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

