पटना से सटा हुआ हाजीपुर (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र मुख्यतः अपने सांसद और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की वजह से ही जाना जाता है. हाजीपुर की जनता ने 1977 के जनता लहर से लेकर 2014 के मोदी लहर तक, 8 बार रामविलास पासवान को चुनकर लोकसभा में भेजा है.
1984 के इंदिरा लहर और 2009 के सुशासन लहर में वे हारे भी हैं. जबकि 1991 के चुनाव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास हाजीपुर से लड़े और जीते थे. अपने पहले चुनाव में ही रामविलास ने हाजीपुर में रिकार्ड 4 लाख से अधिक अंतर से जीत दर्ज की थी. 1989 के चुनाव में उन्होंने अपने रिकार्ड को 5 लाख से भी अधिक अंतर से जीतकर और बेहतर किया. हाजीपुर सीट से बड़ी जीतों के कारण रामविलास पासवान का नाम गिनीज बुक रिकार्ड में भी दर्ज रहा. पासवान को राजनीति में मौसम वैज्ञानिक कहा जाता है.
बिहार के संदर्भ में देखें तो पासवान ने अपने संसदीय क्षेत्र में विकास के कई कार्य किये हैं. रेलमंत्री के रूप में पासवान ने ही हाजीपुर में मध्यपूर्व रेलवे जोन के गठन की घोषणा की थी जो वर्षों बाद लागू हो सकी. संचार मंत्री के रूप में भी उन्होंने टेलीफोन को अपने संसदीय क्षेत्र के हर कोने में ले जाने का काम किया.
हाजीपुर क्षेत्र में ऐसी हवा है कि इसबार रामविलास लोकसभा चुनाव नही लड़ेंगे. भाजपा उन्हें राज्यसभा जाने में मदद करेगी. उनके पुत्र चिराग पासवान जमुई सीट छोड़कर हाजीपुर आएंगे. यदि ऐसा होता है तो यह देखने वाली बात होगी कि चिराग को वह समर्थन मिल पाता है या नही जो उनके पिता को 4 दशकों से भी अधिक समय तक मिलता रहा है. विपक्ष के पास हाजीपुर में कोई स्थापित नाम नही है. रमई राम वर्षों से हाजीपुर सीट से संसद जाने की हसरत रखते हैं. लेकिन वे विधानसभा चुनाव भी बुरी तरह हार चुके हैं. कुल मिलाकर इस सीट पर राजग की जीत आसान रहने वाली है.
