विश्व के लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व की घोषणा हो चुकी है. भारत का आम चुनाव लोकतंत्र का महापर्व होता है. आचार संहिता लागू होना इस महापर्व के आरम्भ की घोषणा है. 2019 के आम चुनाव में 90 करोड़ मतदाता भाग लेंगे. 543 सीटों पर 7 चरणों मे होने वाले इस चुनाव में हजारों प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा और फिर चुने हुए प्रत्याशी 125 करोड़ भारतवासियों के भविष्य की दिशा और दशा तय करेंगे.
अपनी तमाम कमियों, कमजोरियों और असफलताओं के बाद भी भारतीय लोकतंत्र गर्व करने योग्य है. इसमें कोई संदेह नही कि 70 सालों में हमने जो पाया है, वह पर्याप्त नही है. लेकिन इन 70 सालों में भारत ने जो पाया है, वह भी कोई छोटी बात नहीं है.
‘तीसरी दुनिया’ के तमाम देशों में लोकतंत्र सबसे सफल भारत मे ही रहा है. तमाम राजनीतिक विश्लेषक लोकतंत्र की जड़ों को भारत मे मजबूती देने का श्रेय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को देते रहे हैं. लेकिन इसका श्रेय विपक्ष के दीनदयाल उपाध्याय, डॉ लोहिया, कृपलानी और चक्रवर्ती राजगोपालचारी जैसे उन समकालीन नेताओं को भी उतना ही है जिनका लोकतंत्र में अटूट विश्वास था. उन्होंने कभी भी बाहरी या अराजनीतिक शक्तियों को भारत में राजनीतिक हस्तक्षेप का मौक़ा नही दिया. हमें यह भी नही भूलना चाहिए कि नेहरु के बनाए संस्थाओं के रहते हुए भी आपातकाल का वह काला कालखंड भी आया जब नेहरु की बेटी ने ही लोकतंत्र को निर्वासित कर दिया था और भारत की जनता के अधिकारों का गला घोंट दिया था. लेकिन भारत की जनता ने अपने वोट से इंदिरा को ऐसा उत्तर दिया कि उसके बाद के 40 वर्षों में किसी ने लोकतंत्र से छेड़छाड़ के बारे में सोचा तक नहीं.
वास्तव में भारत में लोकतंत्र की मजबूती और स्थायित्व का कारण भारत की संस्कृति में ही निहित है. वज्जि संघ विश्व के ज्ञात इतिहास में पहली लोकतांत्रिक व्यवस्था थी. प्रजा को अपना शासक स्वयं ही चुनना चाहिए, यह सोच भारत मे आज से 2700 वर्ष पूर्व न केवल मौजूद थी बल्कि सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी थी. भारत की सभ्यता में लोकतंत्र के बीज तभी पड़ गए थे जब पाश्चिम ने सभ्यता का पहला अक्षर भी ठीक से नही सीखा था. भारत के लोकतंत्र का एक स्तम्भ भारतीय सेना भी है जिसने देश के सीमाओं की सुरक्षा तो पूरी शक्ति और दृढ़ता से की लेकिन हमारे लोकतंत्र और शासन व्यवस्था में कभी कोई हस्तक्षेप नही किया.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल ने कभी भारत की आजादी का विरोध करते हुए कहा था कि अंग्रेजों के जाने के बाद यह देश बिखड़ जाएगा. भारत के नेता सत्ता के लिए आपस मे लड़ेंगे और भारत टुकड़े टुकड़े हो जाएगा. यह छोटी बात नही है कि हमने चर्चिल को न केवल गलत साबित किया बल्कि हमारी सफलताएं बताती हैं कि चर्चिल कम से कम भारत के मामले में नीरा मूर्ख ही साबित हुए. भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी सामरिक शक्ति है और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. संपेड़ो का मुल्क कहा जाने वाला देश आज सैकड़ों उपग्रह एकसाथ अंतरिक्ष मे भेजता है. डेयरी उत्पादन में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है तो खाद्यान्न उत्पादन में दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है.
भारतीय लोकतंत्र में अपने अंदर सुधार की अद्भुत शक्ति है. कांग्रेस के वर्चस्व वाले दशकों में भारत को एकदलीय लोकतंत्र कहा जाता था. लेकिन हमने देखा कि कितनी तेजी से भारत बहुदलीय लोकतंत्र में परिवर्तित हुआ. कभी भारत पर समाजवाद का ऐसा भूत सवार था कि इंदिरा गाँधी ने संविधान की प्रस्तवना में संशोधन कर समाजवाद और सेकुलरिज्म जैसे शब्द घुसेड़ दिए. लेकिन जब इस रास्ते पर सफलता नही मिली तो भारत नरसिंह राव के नेतृत्व में उदारवाद की राह पर चल पड़ा और सफल रहा.
कभी भारत की आलोचना इसलिए भी होती थी कि सामाजिक रूप से वंचित और पिछड़े तबकों की सत्ता में भागीदारी सीमित थी. लेकिन आज तो पिछड़ी जाति में पैदा हुआ एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री है तो चूहे के बिलों से भोजन ढूंढने वाला हरिजन समुदाय का एक व्यक्ति बिहार का मुख्यमंत्री रह चुका है.
देश ने गठबंधन की राजनीति का दौर भी देखा. राजनीतिक अस्थिरता भी दिखी. लेकिन अल्पमत सरकार का नेतृत्व करते हुए भी नरसिंह राव ने आर्थिक उदारवाद से देश को नयी दिशा दे दी. आधारभूत संरचना व बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करने वाली अटल बिहारी की सरकार भी गठबंधन सरकार ही थी. लेकिन जब जनता ने देखा कि निर्णायक फैसलों में गठबंधन सरकारें बाधा बन रही हैं, तब जनता ने 2014 में एक पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.
हमारी सरकारों की असफलताओं और कमजोरियों पर खूब आलोचना करिए. हमारी सफलताओं की खुशियाँ भी मनाइए. लोकतंत्र को सेलिब्रेट करिए, लोकतंत्र के इस महापर्व से बेहतर मौका क्या होगा खुशियाँ मनाने का? अपना कीमती वोट जरुर दीजिये और भारत के लोकतंत्र को और सफल बनाइये. क्योंकि अभी हमें मीलों दूर जाना है और भारत को ऐसी शक्ति बनाना है जो पूरे विश्व को धर्म और मनुष्यता का रास्ता दिखायेगा.
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