क्रिस्चियन मिशेल के बयान से कांग्रेस परेशान क्यों?

पिछले कुछ दिनों से चोर-चोर की चिल्लम-चिल्ली बाजार में बहुत मची हुई थी. राजनैतिक रूप से एक दल द्वारा देश के प्रधानमंत्री को अपमानजनक शब्द से सम्बोधित किया जा रहा था. शोर मचाने वालों के पास कोई तथ्य नहीं था जिससे वे यह सिद्ध कर पाए कि देश के प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार किया है. न्याय व्यवस्था की चौखट से भी प्रधानमंत्री को निर्दोष बताया गया. परंतु शोर बंद नहीं हुआ. तभी अचानक चींखने वाले लोगों के गले में ‘ऑगस्टा’ फँस गया और ऐसा फँसा कि न निगलते बन रहा है न उगलते. एक नेता बने वकील साहब ने तो ED को ही दोषी ठहराते बोल दिया कि सब कुछ प्रधानमंत्री के कहने पर ED कर रहा है. जाँच एजेंसियों पर भी विश्वास नहीं है इन्हे, मतलब लाठी कपारे भेंट नाहीं अउरी बाप-बाप चिल्ला.

पूरी कहानी यह है कि UPA शासनकाल के ऑगस्टा घोटाले में भारत लाए गए बिचौलिए क्रिश्चन मिशेल ने एक ‘इटालियन महिला के बेटे’ का नाम लिया है. बिचौलिए ने जब यह बात कही तो अभी तक ‘फ्रंटफुट’ पर बल्ला भांज रहे लोग अचानक ‘डिफेंसिव’ खेलने लगे. दिक्कत उनकी बस यही थी कि मैदान में उतरे नए खिलाड़ी की ‘टेक्निक’ ठीक नहीं थी. जिसको टीम का तेंदुलकर समझा था वो मोहम्मद कैफ निकला, बस अंधी लपेट रहा है. क्रिश्चियन मिशेल का यह एक नाम ले लेना पूरी तरह से विपक्षी टीम के होश उड़ा चुका है. सब नाम का ही तो खेल है, नहीं तो 2014 में जेठमलानी लाइव टीवी पर कह चुके हैं कि नामदार को मैं अपना चौकीदार भी न रखूँ. उसी नाम के ऊपर एक और धब्बा लगा है. वैसे 10 साल के उनके शासन में वैसे ही चादर मैली हो चुकी है, तो फर्क नहीं पड़ता. मगर दूसरे की सफेद चादर पर कीचड़ उछालना जरुरी है. इस समय राजनीति में एक ही आदमी के पास ऐसी चादर है जिसके ऊपर न भ्रष्टाचार का इल्जाम है, न चोरी का, और न ही घूसखोरी का.

ऑगस्टा घोटाला देश में हुए घोटालों की माला में एक और घोटाला है. जिनके ऊपर आरोप है उनको कोई फर्क पड़ता नहीं, कोई पहला घोटाला तो है नहीं जिसके दाग उन पर लगे हो. परंतु यह देश की जनता को एक संदेश है. वैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जनता को भी यूरिया के लिए लाठी खाने के बाद एक संदेश मिला है, लेकिन देर से मिला है. अब खेल बस ‘स्लॉग ओवर’ का है. इस मैच में दोनों पावरप्ले खत्म हो चुके हैं. भारत की तरफ से पूरा दारोमदार अब राजनीति के ‘नरेंद्र’ सिंह धोनी पर है. ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो अंतिम ओवर में उनसे बढ़िया कोई नहीं खेलता. मगर इस बार थोड़ा ध्यान से खेलना होगा. सीरीज जीत या हार का फैसला 2019 का आखिरी मैच ही करेगा. 5 मैचों की सीरीज़ में 2-2 की बराबरी पर टक्कर चल रही है. आखिरी और निर्णायक मैच में क्या होता है, यह अब अगले 3 महीनों में पता चलेगा. यहां मुकाबले में दर्शकों के लिए क्या खास है? खास ये है कि यहां अगली गेंद पर चौका या छक्का लगेगा या विकेट गिरेगा या डॉट बॉल जाएगा, इसका निर्णय दर्शकों को ही करना है. उनको देखना है कि सबसे बेहतर खिलाड़ी कौन है. 

फोटो क्रेडिट

6 Comments

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