बॉलीवुड कलाकारों की 60 साल की चुप्पी के बाद इस शोर की क्या है वजह?

बरसाती मेंढकों की तरह हमारे बॉलीवुड कलाकार 2014 के समय से आजकल हर चुनाव के समय अपने ‘नो कमेंट ऑन पॉलिटिक्स’ के कूपे से बाहर आ जाते हैं. कम से कम ये बरसाती मेंढक दूसरों को नसीहतें देते नहीं फिरते. इस इनटॉलरेंट और मुसलमानों के लिए खतरे वाले देश की जनता से ही कमाई कर हमारे ही मत पर सवाल उठाने वाले इस बॉलीवुड का जवाब नहीं.

आम चुनाव से ठीक पहले देश भर के 650 से अधिक थिएटर कलाकारों ने लोगों से अपील की है कि वे भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों को वोट न दें. गुरुवार को इस बाबत उन सभी का हस्ताक्षर किया हुआ साझा बयान भी जारी किया गया.

वैसे तो देश में क्या हो रहा है, उससे इनका कोई सरोकार नहीं. हो सकता है भूले भटके कुछ ट्वीट कर दें पर किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर टिप्पणी तब ही आती है जब एजेंडा चलाने की बात हो. और एजेंडा केवल एक ही है- कुछ भी हो बीजेपी या नरेन्द्र मोदी की सरकार नहीं बननी चाहिए. इन कलाकारों को शायद ना आयुष्मान योजना पता है, न उज्जवला योजना. पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी हमला हो तो ये लोग ढूंढने से भी नज़र नहीं आते. 

कुछ समय पहले पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों को जबरन इस्लाम में कन्वर्ट किया जा रहा था. इमरान खान और पाकिस्तान की सेकुलरिज्म के कसीदे पढ़ने वाला यह बॉलीवुड समाज उस समय चूं तक नहीं कर पाया.

दादरी और अख़लाक़ के लिए झूठे आंसू बहाने वाला  बॉलीवुड कभी संजय के लिए रोएगा? उस संजय को जिसका निजी अंग इसलिए काट दिया गया था क्योंकि उसने एक मुस्लिम से शादी कर कन्वर्ट होने से मना कर दिया. आए दिन होने वाले ऐसे कई हज़ार मामलों पर मुँह में दही जमा लेने वाले बॉलीवुड कलाकार किस हक से खुद को सेक्युलर कहते हैं?

आपने भाजपा और उनके साथियों को वोट न करने की मांग तो कर डाली. फिर क्या चाहते हैं आप? स्कैम्स से भरी कांग्रेस की सरकार या हर रोज़ बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारने वाली लेफ्ट औऱ अन्य जातिवादी पार्टियों को वोट दें हम?

आपमें से कोई पिछले 60 सालों में कोई सवाल या अर्जी देने क्यों नहीं आया? क्या कभी पूछा कि गरीबी क्यों नहीं मिटी. कभी किसी दंगे का जवाब मांगा? क्या कभी उनके शासन काल में कोई मुस्लिम नहीं मारा गया?

हिंदुओं के प्रति नफरत या पक्षपात को एक बार समझ भी लें तो यह समझ नहीं आता कि आखिर क्या मज़बूरी है जो किसी भी और सरकार में आपको खोट नज़र नहीं आती.

भारत पहली बार प्रगति कर रहा है. स्वच्छ भारत के तहत लोग जागरूक हो रहे हैं, आयुष्मान योजना, उज्ज्वला योजना, आवास योजना के अंतर्गत गरीबों का फायदा हो रहा है. पर शायद ये बातें आपके एलीट व्हाटसप ग्रुप में नहीं पहुंच पाती होंगी. 

मौजूदा सरकार के खिलाफ फतवे जारी करते हुए आप यह यह रोना भी रोते हैं कि आपको बोलने की आज़ादी नहीं है. आखिर कब तक आप लोगों को गुमराह करेंगे, समानता और सेक्युलर होने की आड़ में? जनता में कई ऐसे लोग होंगे जो आपको आदर्श मानते होंगे, जो आपके शब्दों को पढ़ कर प्रभावित होते होंगे.

उम्मीद है कि वो भी आपका खेल समझ जाएंगे, वो भी समझ जाएंगे कि आप केवल मौकापरस्त हैं. भले ही आप अव्वल दर्जे के कलाकार हो पर एक नागरिक होने के नाते आप केवल भटकाने का काम कर रहे हैं. हम सब ध्यान रखेंगे कि बीजेपी के सपोर्ट में जो होता है, वह प्रोपेगण्डा है और जो उसके खिलाफ हो, वह अभिव्यक्ति की आज़ादी है.

Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

1 Comment

  1. Rahul Gupta
    April 7, 2019 - 9:48 am

    ये 600 लोगों की लिस्ट मिल सकती है क्या बड़े भईया

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