कीमत क्या हो शांतिकाल की

राष्ट्र हृदय जब चीख़ रहा हो,
अश्रु नयन भर दीख रहा हो,
एक प्रश्न तब हर मन पूछे,
कहाँ जगह हो खड्ग-ढाल की?
क़ीमत क्या हो शांतिकाल की?

लहू बह रहा जब मनुजों का,
अट्टहास गूँजें दनुजों का,
क्या रघुवीर मूक हो बैठें,
देख बुनावट युद्ध-जाल की?
क़ीमत क्या हो शांतिकाल की?

गरल-घूँट कब तक पीना है,
कायर हो कब तक जीना है,
कब तक पौरुष धार न फूटे,
हो अधीर नगपति विशाल की?
क़ीमत क्या हो शांतिकाल की?

प्राणाहुति से राष्ट्र-यज्ञ है,
बलिदानों प्रति यह कृतज्ञ है,
हर युग दर्शन जो करवाए,
काली माँ के मुंडमाल की,
कीमत क्या हो शांतिकाल की?

दिग-दिगंत विष-वायु जो लहरे,
बस अनीति-ध्वज चहुँदिश फहरे,
पार्थसारथी राह दिखाओ,
रक्षा हो इस राष्ट्र भाल की,
क़ीमत क्या हो शांतिकाल की?

फ़ोटो क्रेडिट

CA & Blogger @shivkmishr