झारखंड की सीमा से सटा पश्चिम बंगाल का पुरुलिया जिला पिछड़ा और आदिवासी बहुल है. यहाँ महतो कुड़मी जाति की अच्छी तादाद है. इस सीट पर आजतक कुड़मी ही चुनाव जीत सके हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार तृणमूल कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली थी. पुरुलिया नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी रहा है. लंबे समय तक वाममोर्चा का इस पूरे इलाके में दबदबा रहा है. 2014 के लोकसभा चुनावों में भी भजपा यहाँ कुछ खास प्रदर्शन नही कर सकी थी.
लेकिन 2018 के पंचायत चुनावों में 633 ग्राम पंचायतों पर भगवा लहराकर भाजपा ने सबको चौंका दिया. पुरुलिया पश्चिम बंगाल के सबसे पिछड़े और गरीब इलाकों में से एक है. बेरोजगारी चरम पर है. शराब की अवैध भट्टियां भी एक मुद्दा हैं. यहाँ पुलिस के राजनीतिकरण का आरोप भी लगता रहता है. राजनीतिक गुंडागर्दी के कारण भी सत्तासीन तृणमूल के विरुद्ध माहौल बन रहा है. वाममोर्चा और कांग्रेस बेहद कमजोर पड़ चुके हैं.
2019 में मुकाबला भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच ही रहने की संभावना है. यही कारण है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को अक्सर प्रताड़ना झेलना पड़ता है.

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