बात तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में था. मैंने तब अपने आप को यह स्वतंत्रता दी कि मैं आगे क्या करूँ. मेरे परिवार में बहुत
बात तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में था. मैंने तब अपने आप को यह स्वतंत्रता दी कि मैं आगे क्या करूँ. मेरे परिवार में बहुत
पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में भारत माँ के 40 से अधिक बेटे शहीद हो गए हैं. इस हमले के लिए विस्फोटक से भरी गाड़ी का इस्तेमाल किया गया जो
“मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा कहा गया है. वे साधारण नानबाई नहीं हैं. वे खानदानी नानबाई हैं. अन्य नानबाई रोटी केवल पकाते हैं, पर मियाँ नसीरुद्दीन अपने पेशे को