हिंदुत्व के आन्दोलन से जुड़े संगठनों और उनसे सहानुभूति रखने वाले राजनीतिक दलों पर यह आरोप अक्सर ही लगता है कि जिस वैभवकाल को ये वापस लाने की बात करते
हिंदुत्व के आन्दोलन से जुड़े संगठनों और उनसे सहानुभूति रखने वाले राजनीतिक दलों पर यह आरोप अक्सर ही लगता है कि जिस वैभवकाल को ये वापस लाने की बात करते
बदलते जमाने के साथ हमें भी बदलना चाहिए, यही समय की रीत है. कलि प्रथम चरण में ताबड़तोड़ ऐसे एसे बदलाव हुए कि लोग हैरान-परेशान सोचते रहे और आसपास द्रुत