मायके की छूटती देहरी को बार-बार तकना हर याद नयन में लिए, नयन भर-भर आना ज़िक्र भर से ही नयनों का अल्हड़ हो जाना मोहक हैं यादें, नयनों को फिर
मायके की छूटती देहरी को बार-बार तकना हर याद नयन में लिए, नयन भर-भर आना ज़िक्र भर से ही नयनों का अल्हड़ हो जाना मोहक हैं यादें, नयनों को फिर