आईने के सामने ध्यान अनायास ही बालों की ओर चला गया. बालों की गिरती संख्या और घटते घनत्व पर चिंता हुई. साथ ही, पुराना ज़माना भी याद आ गया, जब
आईने के सामने ध्यान अनायास ही बालों की ओर चला गया. बालों की गिरती संख्या और घटते घनत्व पर चिंता हुई. साथ ही, पुराना ज़माना भी याद आ गया, जब
सर्दियों में अक्सर वह सफेद बैकग्राउंड पर वायलेट रंग के शेड्स में महीन फूल-पत्तियों के छाप वाली साड़ी पहन कर आती थी. उसे देखते हीं मेरे सहकर्मी कहते थे; “लो सर