एक्टिविस्ट हरीश अय्यर कांग्रेस में शामिल हो गए. जिनको LGBT का नहीं पता वो शिखंडी के पात्र को याद कर लें और नाक की सीध में कलियुग तक चलते आएं. कलियुग में आने के बाद इसी वर्ग को LGBT कहा गया है.
कालांतर में उनको एक और शब्द से भी संबोधित किया जाता था, लेकिन हम उस अपमानजनक शब्दावली के सख्त खिलाफ हैं. ख़ैर, बात हो रही थी हरीश अय्यर की. यह कोई जाने माने नाम नहीं हैं. टीवी चैनलों पर भी कम दिखते हैं. कांग्रेस में शामिल होने के बाद इन्होंने जो बयान दिया, वह ध्यान देने वाला है.
इन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद होमोफोबिया, इस्लामोफोविया, जातिवाद, हिंसा, राजनैतिक द्वेष और नफरत की राजनीति खत्म करेंगे.
इनके संकल्प में दो ऐसी चीजें हैं जो आपस में परस्पर मेल नहीं खाती. इस्लामोफोबिया और होमोफोबिया! जिन्होंने कुरान पढ़ी है, वो यह समझ लेंगे. जिन्होंने नहीं पढ़ी है, वो पढ़ लें क्योंकि यदि हम बताएंगे तो गूगल बाबा नाराज़ होकर पोर्टल बंद कर देंगे.
सनातन धर्म में भी इसके ऊपर सवाल उठे हैं, लेकिन हमने समय-समय पर उसको गलत सिद्ध किया है. पांडवों की सेना में शिखंडी का होना इसका एक उदाहरण है. अय्यर भले ही सकारात्मक दृष्टि से इसको देख रहे, परंतु एक सच्चाई यह भी है कि देश का एक वर्ग इसको ‘गुनाह’ मानता है.
उस वर्ग को नाराज़ करना कांग्रेस के राजनैतिक DNA में नहीं है. अब कांग्रेस के नेता हैं तो देश बचाने वाला नारा क्यों नहीं देंगे. यह भी दे दिया. फिर भी इस्लामोफोबिया और होमोफोबिया को एक पंक्ति में रखने से पहले एक बार धरातल पर आ सच्चाई देखनी चाहिये.
जब हरीश अय्यर होमोफोबिया और कांग्रेस का समर्थन का ज़िक्र एक ही सांस में करते हैं तो वे शायद भूल जाते हैं कि मोदी सरकार ने ही न्यायालय में शपथपत्र देकर धारा 377 को हटाने का समर्थन किया था और इसी सरकार के रहते यह धारा हटी।
एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने धारा 377 हटाने के लिए स्पष्ट शब्दों में बातें कहीं हैं, वहीं कांग्रेस अपने राजनैतिक चरित्र के अनुसार सब कुछ झोले में उठाने की फिराक में है. वह किसी को नाराज़ नहीं करना चाहती, कट्टरपंथियों को भी नहीं क्योंकि उसको लगता है कि वे नमक का कर्ज अदा करेंगे.
विडंबना देखिये कि जो खुद को देश आज़ाद कराने वाली पार्टी कहती है, वही कश्मीर को एक अलग राज्य की तरह बनाने वाले आर्टिकल के समर्थन में है. यह कहाँ की राजनीति है? ऊपर से अय्यर ने इन बातों पर राहुल गांधी से कोई जवाब नहीं मांगा.
वैसे उनका अपना मत है लेकिन सच्चाई यह है कि आज खुद के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस ने कुछ बुनियादी कदम गलत उठा दिया है और अब उसको सही सिद्ध करने की एक नामुमकिन कोशिश कर रही है. हरीश अय्यर को उनकी राजनैतिक पारी के लिए बधाई. स्पष्ट है, राह आसान न होगी.
