आयकर छापों से कांग्रेस के भ्रष्टाचार का होता खुलासा

देश भ्रष्टाचार के चंगुल से आज़ाद होने के लिए संघर्ष कर रहा है. विगत 5 सालों में काफ़ी हद तक इससे कामयाबी भी हासिल हुई है. एक ओर यूपीए सरकार में बड़े-बड़े घोटाले सामने आते थे तो दूसरी ओर मोदी सरकार के 5 साल के कार्यकाल में घोटाले का एक भी मामला अब तक सामने नहीं आया है. यूँ तो सरकार पाक साफ है लेकिन देश का मुख्य विपक्षी दल भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ प्रतीत होता है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर लगातार छापे व कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी के करीबी व राज्यसभा सांसद अहमद पटेल का नाम अगस्ता वेस्टलैंड मामले में सामने आना भ्रष्टाचार की पराकष्ठा है.

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में अहमद पटेल ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया था. लेकिन अब अहमद पटेल एक बार फिर विवादों में हैं. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जिस कार्यकर्ता के यहां छापेमारी की गई थी उसके साथ अहमद पटेल की तस्वीर सामने आयी है. इस तस्वीर के सामने आने के बाद अहमद पटेल एक बार फिर इनकम टैक्स की रडार पर आ गए हैं.

रिपोर्ट्स की मानें तो कांग्रेस के जिस कार्यकर्ता के घर में छापेमारी की गई थी, उसकी पहचान एस एम मोईन के रूप में की गई है. आईटी का दावा है कि शनिवार (6 अप्रैल) को उन्हें सूचना मिली थी कि हवाला के जरिये पार्टी के दफ्तर पर 20 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे. 

जिस तस्वीर का को लेकर विवाद गरमाया हुआ है, उस तस्वीर में अहमद पटेल को एस एम मोइन के साथ बैठे देखा जा सकता है. हालांकि अब तक मोइन के साथ अहमद पटेल की तस्वीर की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकी है.

ज्ञात हो दिल्ली की आयकर टीम द्वारा मध्य प्रदेश सहित तीन राज्यों के करीब पचास ठिकानों पर की गई छापेमारी में बड़ा खुलासा हुआ है. कार्रवाई में 281 करोड़ रु. के बेहिसाबी कैश रैकेट का पता चला है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने अनुसार राजनीति, व्यापार और सरकारी सेवाओं से जुड़े लोगों के जरिए यह रकम इकट्ठा की गई थी.

रिपोर्ट्स के अनुसार कैश का एक हिस्सा हवाला के जरिए दिल्ली स्थित एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय में भी ट्रांसफर किया गया है. इसमें 20 करोड़ रुपए की वह रकम भी शामिल है, जिसे हाल ही में पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के तुगलक रोड स्थित आवास से पार्टी मुख्यालय में भेजा गया था.

हालांकि सीबीडीटी की तरफ से जारी बयान में किसी नेता के नाम का जिक्र नहीं किया गया है. सीबीडीटी ने बताया कि एक पदाधिकारी के करीबी रिश्तेदार के समूह के दिल्ली स्थित ठिकानों पर छापों के दौरान कई सबूत मिले हैं. इनमें एक डायरी भी शामिल है, जिसमें 230 करोड़ के बेनामी लेन-देन का जिक्र है.

अभी मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आए कुछ ही महीना हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर छापे स्पष्ट करते हैं कि कांग्रेस में भ्रष्टाचार किस हद तक हावी है. जिन लोगों के यहां छापेमारी की जा रही है, उनके साथ कांग्रेस नेताओं के संबंध पर पार्टी के द्वारा कोई भी बयान नहीं दिया जाना एक बात स्पष्ट करता है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को नेताओं के कारनामों के बारे में पूर्व से ही जानकारी थी. लेकिन अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई.

सीबीडीटी की इस छापेमारी को कांग्रेस द्वारा राजनीतिक रूप देने का प्रयास अवश्य किया जा रहा है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए इस प्रकार की छापेमारी की जा रही है. मतलब कांग्रेस को अब देश की सेना के बाद जांच एजेंसियों पर भी भरोसा नहीं रहा.

बहरहाल, इन छापेमारी से जनता को समझ आ रहा होगा कि कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का रंग एक बार फिर चढ़ने लगा है. विधानसभा चुनाव में जीत के अभी 6 माह भी पूरे नहीं हुए हैं, और कांग्रेसी नेता भ्रष्टाचार में पुनः लिप्त नज़र आ रहे हैं. यदि इन्हें केंद्र में सत्ता पुनः दे दी गई तो वह दिन दूर नहीं होंगे जब अगस्ता वेस्टलैंड, बोफोर्स, 2जी, कोल ब्लॉक जैसे घोटाले पुनः होने लगेंगें. 

1 Comment

  1. Jan
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