‘भारत’ केवल नाम ही काफ़ी है. आज भारत विश्व महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर है. भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. वह दिन दूर नहीं जब भारत की नीतियां व रणनीतियां संपूर्ण विश्व को संचालित करेंगी.
भारतीय राजनीति व सरकार के फैसले पर आज हर एक देश नज़र गड़ाए बैठा है. सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर नोटबन्दी व एयर स्ट्राइक तक तथा हाल ही में अंतरिक्ष की सफलता पर सभी पड़ोसी देशों एवं यूरोप प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई. यह बात सभी को पता है कि भारत सरकार सशक्त व त्वरित निर्णय लेने में सक्षम है, साथ ही, हर मोर्चे पर किसी भी समस्या का समाधान प्राप्त करने की क्षमता भी भारत के पास है.
देश की अंतरिक्ष मे हुई जीत ‛मिशन शक्ति’ के विषय में पाकिस्तान व चीन की प्रतिक्रियाओं से साफ पता चलता है कि दोनों ही पड़ोसियों में डरका माहौल है. लेकिन सबसे अधिक आश्चर्य हुआ अमेरिका की प्रतिक्रिया से.
अमेरिका वह देश है जो दुनिया भर के सभी देशों को छोटे से मिसाइल परीक्षण पर भी बैन लगाने की धमकी देता रहता है, किन्तु ‘मिशन शक्ति’ के विषय में अमेरिका ने हिंदुस्तान की तारीफ़ की. लेकिन इस तारीफ में एक बात और थी जो छिपी रह गई, वह थी डर या नफ़रत.
इन दो शब्दों डर व नफ़रत में विरोधाभास इसीलिए है क्योंकि अमेरिका कभी ऐसा था ही नहीं. दरअसल अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारत के ‘मिशन शक्ति’ को बेहद खतरनाक बताया है. नासा के अनुसार भारत के एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण से अंतरिक्ष की कक्षा में करीब मलबे के करीब 400 टुकड़े फैल गए हैं. इससे भविष्य में अतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों में शामिल नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टाइन ने सोमवार को कहा कि भारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किमी दूर मौजूद सैटेलाइट को मार गिराया जो कक्षा में ज्यादातर सैटेलाइटों से नीचे था. नष्ट की गई सैटेलाइट के 24टुकड़े अतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से ऊपर भी हैं.
अंतरिक्ष स्टेशन के ऊपर मलबे के टुकड़े पहुंचना खतरनाक और अस्वीकार्य है. इससे भविष्य में स्पेस वॉक कर रहे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए ऐसी गतिविधियां मानव स्पेस फ्लाइट के लिए अनुकूल नहीं है.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पूर्व अध्यक्ष वीके सारस्वत नासा की चिंताओं को पहले ही खारिज कर चुके हैं. उन्होंने नासा द्वारा व्यक्त की गई चिंता को काल्पनिक बयान बताया है. श्री सारस्वत के अनुसार हमारे A-Sat मिसाइल टेस्ट से अंतरिक्ष में जो भी कचरा फैला है, उनमें पर्याप्त गति नहीं है. इसलिए वह लंबे समय तक अंतरिक्ष में टिक नहीं सकते.
300 किमी की ऊंचाई पर मौजूद ये टुकड़े कुछ समय बाद अपने आप गिरकर पृथ्वी के वातावरण में आएंगे और जलकर नष्ट हो जाएंगे.
साथ ही, श्री सारस्वत ने एक अन्य महत्वपूर्ण बात कही कि ‘मिशन शक्ति’ पर अमेरिका की चिंता भारत की प्रगति से ‘डील’ करने का ये अमेरिकी तरीका मात्र है. अमेरिका भारत की वास्तविक शक्ति को जान चुका है व फ़िलहाल वह भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में ही भलाई समझता है.
साथ ही अमेरिका को आईएमएफ के आकंड़े भी पता ही हैं जिसके अनुसार भारत अगले दस वर्षों में विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को आसानी से पछाड़ सकता है. इसका सीधा मतलब यह है कि भारत आज ताक़तवर है, व उसका सीधा विरोध करने की हिम्मत विश्व महाशक्ति में भी नहीं है.
भारत-अमेरिकी संबंधों के जानकार वर्तमान स्थिति को देखकर कहते हैं कि अमेरिका का भारत के प्रति रुख बेहद नरम है, जो कभी नहीं रहा है. निश्चित तौर पर यह वर्तमान भारतीय सरकार के साहसिक फैसलों व सम्बंधों में आयी निकटता का ही परिणाम है. इन संबन्धों की शुरुआत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा व श्री मोदी ने की थी, उन्हें आज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व मोदी मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं.
