विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लोकसभा चुनावों की तारीखें पास आ रही हैं. भारत में हर व्यक्ति स्वयं में राजनीतिज्ञ है. यहाँ लगभग हर व्यक्ति के पास चुनाव के लिए अपना एक ओपिनियन होता है, मतलब ‘किसको वोट करना है और किसको नहीं’ के अतिरिक्त भी ज्ञान का भंडार है. चुनाव के समय जहाँ एक पार्टी दूसरी पार्टी पर लगातार आरोप लगाती है तो वहीं दूसरी ओर जनता भी राजनीतिक मसलों में आपस में ही वाद-विवाद प्रतियोगिता जारी रखती है.
एक आम आदमी के नज़रिए से देखा जाए तो वोट उसे ही करना है जो चुनाव जीतने के बाद कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो उपलब्ध करवाए. लेकिन जनता इस बात का भी ध्यान रखती है कि जिसको वोट कर रहे हैं, उसकी छवि कितनी अच्छी और कितनी खराब है. यूँ तो वर्तमान राजनीति में बिना विवाद के कोई भी नेता मिलना भगवान के मिलने जैसा है, फिर भी यदि नेता थोड़ा बहुत भी साफ-सुथरी छवि का है तो जनता उसे वोट करती है. मगर यदि प्रत्याशी पर भ्रष्टाचार का बड़ा मुक़दमा चल रहा हो तब?
यहां बात चल रही है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रिय नेता पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे की. नाम है कार्ती चिदंबरम. इन्हे कांग्रेस ने तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से विरोध के वाबजूद प्रत्याशी बनाया है. कार्ती को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध के पीछे कई कारण है. कार्ती को आए दिन कोर्ट में हाज़िरी लगानी पड़ती है. इस हाज़िरी की ख़ास बात यह है कि इसके लिए वह अकेले कम ही जाते हैं, क्योंकि उनके पिता को भी साथ में जाना पड़ता है.
पिता पुत्र दोनों पर ही एयरटेल-मैक्सिस डील में भ्रष्टाचार का आरोप है. यह भ्रष्टाचार पी. चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते हुए ही हुआ था. पी. चिदंबरम पर करीब 12 साल पहले 2007 में सीबीआई ने केस दर्ज किया था, उन पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए ग़लत तरीक़े से विदेशी निवेश को मंज़ूरी दी थी. उन्हें केवल 600 करोड़ रुपए तक के निवेश की मंज़ूरी का अधिकार था लेकिन उन्होंने 3500 करोड़ रुपए के निवेश को मंज़ूरी दी. कुल मिलाकर वित्तमंत्री रहते हुए बड़ा घोटाला कर दिया गया था.
इसके अतिरिक्त कार्ती चिदंबरम की मां नलिनी चिदंबरम का नाम भी बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले में सामने आया था. इसके बाद नलिनी चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी. फिलहाल नलिनी चिदंबरम अग्रिम जमानत पर हैं. अब जबकि चिदंबरम परिवार की बात आ ही गई है तो फिर कार्ती की पत्नी का नाम कैसे छूट सकता है. कार्ती की पत्नी श्रीनिधि चिदंबरम के खिलाफ गत वर्ष आयकर विभाग ने परिजनों सहित काला धन मामले में चार आरोप पत्र दाखिल किए थे. इन पर आरोप है कि इन्होने करीब 9 करोड़ रुपए के कालेधन को आयकर विभाग से छुपाया है. कार्ती के माता-पिता व वह स्वयं भ्रष्टाचार के मुकदमे में जमानत पर हैं, तब कांग्रेस द्वारा उन्हें प्रत्याशी बनाया जाना हज़ारों सवाल खड़े करता है. ऐसा कतई नहीं है कि कांग्रेस में प्रत्याशियों की कमी है किंतु राजनीति को केवल कुछ परिवारों तक सीमित करने की मंशा के कारण ही कार्ती को शिवगंगा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है जबकि कार्ती 2014 लोकसभा चुनाव इसी सीट से हार चुके हैं.
एक वक़्त ऐसा था जब भारत में राजनीतिक स्वच्छता के लिए कांग्रेस की दुहाई दी जाती थी. लेकिन अब कांग्रेस द्वारा ऐसे लोगों को उम्मीदवार बनाया जा रहा है. कांग्रेस की मानसिकता व इस राष्ट्र की राजनीतिक स्थिति को स्पष्ट समझा जा सकता है. सनद रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं.
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