शीशे के घर में रहने वाली प्रियंका चतुर्वेदी जी, दूसरों के घरों में पत्थर फेंकना ठीक नहीं

राजनीति में छींटाकशी आम बात है, आए दिन नेताओं का एक दूसरे पे लांछन लगाना, घटिया आरोप मढ़ना कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं है. पर कई बार आरोप कुछ सीमाओं को लाँघ जाते हैं. कुछ बयान या तंज ऐसे कसे जाते हैं जिन पर ना हँसी आती है ना ग़ुस्सा. केवल एक दयनीय स्थिति नज़र आती है जिसमें वक़्ता की इस हद तक गिरने की क्या मजबूरी होगी यही सवाल उठता है.

स्मृति ईरानी की येल डिग्री पर पहले भी काफ़ी सवाल उठ चुके हैं. कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कुछ ही देर पहले एक कॉन्फ़्रेन्स में उसी पर प्रश्न उठाया पर सवाल उठाते समय प्रियंका जी ने उनके सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहु का मखौल भी उड़ाया.

प्रियंका जी ने कॉन्फ़्रेन्स में सीरीयल का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा ‘एक नया धारवाहिक आने वाला है, क्योंकि मंत्री भी कभी ग्रैजुएट थी. उसका ओपनिंग लाइन होगा ‘कवालिफ़िकेशन के भी रूप बदलते हैं, नए नए साँचे में ढलते हैं. एक डिग्री आती है, एक डिग्री जाती है, बनते एफ़िडेविट नए.

इन सब बातों में सबसे बड़ी विडम्बना की बात तो यह है कि प्रियंका चतुर्वेदी ख़ुद को ISB का पास आउट बताती हैं पर इस बात का उन्होंने कभी कोई सबूत नहीं दिया. यहाँ तक कि जब लोगों ने इस पर सवाल उठाए तब उन्होंने चुपचाप कालेज का नाम अपने ट्विटर बायो से हटा दिया .

प्रियंका जी ही नहीं उनके हाइकमान गांधी परिवार की डिग्रियों का भी कोई सबूत नहीं है. मीडिया और विपक्ष ने जितना नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी को उनकी शैक्षिक योग्यता पर घेरा है उतना किसी भी और नेता को कभी घेरा नहीं गया. गांधी परिवार जो कि हर समय मीडिया की नज़रों के सामने रहता उस पर आजतक किसी पत्रकार ने सवाल नहीं उठाया.

नेता होने के नाते प्रियंका जी का पूरा हक़ बनता है कि वो स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाएँ पर उन्हें यह करने से पहले अपने गिरेबाँ में भी झाँक कर एक बार देख लेना चाहिए था.

यह पहली बार नहीं है जब प्रियंका जी ने ऊल जलूल बातें की हैं इससे पहले कई बार ट्वीट्स में गणित में हाथ कमज़ोर होने का नमूना वो पेश कर चुकी हैं.

दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

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