मध्य प्रदेश के कमलनाथ का कीचड़ का करोबार सामने!

पैसा, शराब, शेर की खाल, हवाला लेन देन…ये सब मध्य प्रदेश में शुरू हुए व्यापार से पता चला है…नया राजनैतिक व्यापार! यह देश के साथ ही मध्य प्रदेश पर भी एक बहुत बड़ा आघात था.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) का कहना है कि मध्य प्रदेश में दिल्ली आयकर निदेशालय द्वारा की गई खोजबीन से पता चला है कि व्यवसाय, राजनीति और सार्वजनिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग व्यक्तियों के माध्यम से लगभग 281 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी एकत्र की गई है. यह देश की अर्थव्यवस्था को चूना लगाने के लिए पर्याप्त धनराशि है.

CBDT ने यह भी बताया है कि नकदी का एक हिस्सा तुगलक रोड, नई दिल्ली पर स्थित दिल्ली के एक प्रमुख राजनीतिक दल के मुख्यालय को भी हस्तांतरित किया गया, जिसमें लगभग 20 करोड़ रुपये शामिल थे, जो हाल ही में हवाला के माध्यम से राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी के आवास से स्थानांतरित किया गया था. अब दिल्ली की मुख्य विपक्षी पार्टी कौन है, यह सभी जानते हैं. वैसे भी यह उस पार्टी के मूल सिद्धांतों में ‘घी पियो’ की नीति हमेशा से रही है.

CBDT के खुलासे यही नहीं बंद हुए. 14.6 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, 252 बोतल शराब, कुछ हथियार और बाघ की छिपाई हुई खाल मिली. वरिष्ठ पदाधिकारी के करीबी रिश्तेदार के समूह में दिल्ली में तलाशी के कारण नकद साक्ष्य रिकॉर्डिंग सहित कुछ और साक्ष्य जब्त किए गए, जिसमें 230 करोड़ रुपये का बेहिसाब लेनदेन दर्ज किया गया.

आईटी छापे के दौरान, अहमद पटेल को कांग्रेस कार्यालय में मुख्य लेखाकार एसएम मोईन के साथ बैठे देखा गया, जिन्होंने आईटी विभाग के अनुसार 6 अप्रैल को हवाला के माध्यम से 20 करोड़ रुपये प्राप्त किए और राशि को कांग्रेस के कार्यालय में पहुँचाया.

यह पूरा लेन देन मुख्य रूप से चुनावों को प्रभावित करने के लिये ही नहीं किया जा रहा था बल्कि इसके पीछे वर्षों से बनाई गई एक व्यवस्था थी. यह पर्यावरण के साथ ही अर्थव्यवस्था में भी एक इमबैलेंस क्रिएट कर रहा था. सोचिये इसके पीछे कितनी बड़ी राजनैतिक पैठ रही होगा. मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा CRPF को रोकना और CBI के कार्यों में विघ्न उत्पन्न करना इसी उद्देश्य को छिपाने का एक प्रयास था. 70 वर्षों पुरानी एक राजनैतिक पार्टी के गड्ढे अब दिखाई देने लगे हैं. फिलहाल मीडिया सोया हुआ है. आशा है जल्दी ही नींद टूटेगी.

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