शरद; “हां तो प्रेम, तुम्हारी शादी का क्या हुआ ?”
प्रेम; “यार, फिक्स हो गयी. इसी अप्रैल में है.”
शरद; “अर्रे, तुम फ़ोन पर तो कह रहे थे कि घरवालों ने जाने कहाँ फसा दिया. अब उसी रिश्ते के लिये कैसे तैयार हो गए ?”
प्रेम; “यार, उस वक्त मैं लड़की के घर पर था और लड़की को देखने के तुरंत बाद तुम्हारा कॉल आ गया था. थोड़ी देर बाद घर वालों से बातचीत की और खुद को समय दिया, तब जाकर शादी करने का निर्णय लिया.”
शरद; ” मैं समझा नहीं, साफ साफ बताओगे कि क्या हुआ था वहाँ ?”
प्रेम; “यार, तुम तो जानते हो कि घरवालों ने एकलौता होने के कारण अपने लाड़ प्यार से मुझे सर चढ़ा रखा था. मम्मी ने तो बचपन से लेकर आज तक रिश्तेदारों के सामने मेरी सांवली सलोनी सूरत के कसीदे पढ़े हैं और फिर यह सरकारी नौकरी. ऐसा परिवार लाखों रुपये दहेज देकर भी नहीं मिलता है. फिर मैंने भी एक राय बना रखी थी या कह सकते हो कि मन की चाहत थी कि लड़की ऐश्वर्या राय जैसी खूबसूरत होनी चाहिए, भले दहेज एक पैसा ना मिले. तुमने तो देखा ही होगा, एक से एक बनमानुष लड़कों को सुंदर लड़कियां मिल जाती हैं. मैं तो सिर्फ सांवला हूँ. मेरी मम्मी हमेशा से कहती रही हैं कि लड़कियां गोरी और लड़के सांवले ही अच्छे लगते हैं.”
शरद; ” हां सही तो है, फिर दिक्कत कहाँ आयी ?”
प्रेम; ” हमारे यहाँ शादी के प्रॉसेस में सबसे महत्वपूर्ण और विचित्र काम है लड़की को देखने उसके घर जाना और एक नजर देख कर तुरंत फैसला देना.”
शरद; “तो मोबाइल में फ़ोटो मंगा लेते ?”
प्रेम; “यार, बोला था मम्मी को, पर लड़की का भाई डेढ़ शाना था. मम्मी को फ़ोटो दिखा कर बोला कि लड़की देखने जाना पड़ेगा, ऐसे फ़ोटो नहीं भेजेगा मोबाइल पर.”
शरद; “फिर क्या हुआ ?”
प्रेम; ” वहाँ पहुँचकर शुरूआती एक्सपीरियंस मन खराब करने वाला था. हम पहुंचे तो उनलोगों ने हमें आगे वाले कमरे में बिठा दिया. मै सोफा चेयर पर बैठा, मम्मी पापा सोफे पर और ताऊ जी दीवान पर. काफी देर तक हम एक दूसरे की शक्ल ही देखते रहे. मम्मी लड़की वालों से बात करते वक़्त झूठी स्माईल बातों में बरसा रहीं थी. थोड़ी देर बाद उधर से चाय नमकीन आती है. लड़की के ताऊ जी की डेयरी है तो चाय बिल्कुल बिना पानी बनी थी. मैने झट से कप उठाया ताकि स्माइल कम करुं और जब करूँ तो मसाले वाले दांत छुपा पाऊं. मन में दुविधा थी कि कौन सी नमकीन उठाऊं, एक थी काजू मिक्स और दूसरी थी शाही मिक्स, और दोनों मुझे बेहद पसंद हैं. तभी मेरा साला मुझे बिस्कुट पकड़ा गया. मैंने मना तो किया पर ये नहीं कह पाया कि बिस्कुट नहीं, मुझे नमकीन खानी है. मैंने प्लेट से बिस्कुट उठा लिया. मैं कशमकश से जूझ ही रहा था कि बिस्कुट चाय में डुबो कर खाऊं या सूखा कि ताऊ जी ने चाय में ज़ोर का सुड़का मारा. आत्मा ऐसे कांप गयी मेरी कि मैंने कप रखकर बिस्कुट खाना शुरू किया.”
शरद; ” तुम्हारे मन मे ऐसी आफत मची थी ?
प्रेम; ” हां यार, तुम नहीं समझोगे. ख़ैर, ताऊ जी को मैंने माफ करके दुबारा चाय उठा ली. इस बार मुझे नमकीन उठानी ही थी कि बड़े साले ने अपने छोटे बेटे से कहा ये सब नाश्ता यहां से हटाओ. मेरा मुँह इतना सा रह गया . उसने आगे कहा कि बेटा, जाओ बुआ को बोलो यहां आने के लिए. थोड़ी राहत हुई जब लड़की रेड सूट और ग्रीन दुप्पटे में आई. उसने कानों में लंबे झाले पहन रखे थे. उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह डर के कांप रही हो. उसके बैठने पर घर वालों ने सवालों का सिलसिला शुरू कर दिया – खाना बनाना जानती हो? कितना पढ़ी हो? और क्या क्या पसंद है?”
शरद; “फिर ?”
प्रेम; “मम्मी ने अपना जेनेरिक स्टेटमेंट दिया कि हमको कुछ नहीं चाहिए, बस एक संस्कारी लड़की चाहिए, जो परिवार को समझे और सबको अपना मानकर सम्मान दे. लड़की ने उत्तर दिया कि मैं कभी आप लोगों को शिकायत का मौका नहीं दूंगी. मम्मी का क्या था पिघल गयीं और बोलीं कि बिटिया ऐसा है तो तुम हमको पसंद हो.”
शरद; “और हो गया रिश्ता फाइनल ?”
प्रेम; “कहाँ यार, मेरे होश उड़ गए. मैंने मम्मी को कस के घूरा और लड़की वालों से हमें थोड़ा समय अकेले देने को कहा. सारे चले गए तो मैं अपने घर वालों पर खूब बरसा कि आप लोगों ने इस लड़की को दिखाने के लिए बुलाया था मुझे? उसकी शक्ल और फिगर देखा है ? देहाती लगती है, ना ढंग है ना तमीज़ ऐसी लड़की से मैं शादी करूँगा? जैसे मन करे वैसे मना करो इन लोगों को.”
शरद; “क्या? फिर शादी कैसे फिक्स हो गयी”?
प्रेम; ” यार, मैं बहुत गुस्से में था. फ़िर भी ये सोचकर कि आवाज़ बाहर जा रही होगी, मैंने खुद को रिलैक्स किया. मैने दरवाजा खोलकर लड़की के भतीजे से पूछा कि वाशरूम कहां है. वाशरूम गया, मुंह धोया, थोड़ी देर कुछ सोचा और फिर वापस गया. वापस जाकर मैंने रिश्ते के लिए हाँ कर दी.”
शरद; ” एक पल में कैसे दिमाग बदल सकता है, ऐसा क्या हुआ वाशरूम में”?
प्रेम; “वाशरूम में मैंने मुंह धोया, गर्दन पर पानी छिड़का, दोनों कानो पर ठंडे हाथ लगाए और लंबी सांस ली. फिर सामने लगे दर्पण में मैने खुद को तसल्ली से देखा, और वापस जाकर रिश्ते के लिए हां बोल दिया.”

11 Comments
जोरदार
बहुत ही सुंदर और सटीक लेखन
बेहतरीन
काफी अच्छा लिखा…..
सभी को अपनी शारीरिक बनावट, मानसिक संतुलन और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए।
लिखती रहें…..थोड़ा और लम्बा होता तो ज्यादा आनंद ले पाता।
Nice story..felt like I am reading one of my father in law’s written story. He is also a hindi writer and last year awarded with Sahitya Academay Award.
Keep it up
Khoobsurat
realy nice…as we read we can imagine whats going on there….well defined…if one can see his true worth then life get quite easy…keep up writing…
लजवाब
You know… It often happens in India that actually people misuse that tradition and hide shortcoming of the girl. But yeah… We are still great to have this decency in us.
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