देश की सेना पर विश्वास नही, हर बार कुछ लोगो को सुबूत चाहिए

भारतीय वायुसेना ने पराक्रम दिखाते हुए पुलवामा हमले का बदला पाकिस्तान से ले लिया है. इस बदले के बाद से ही पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई थी. वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक पर सभी देशवासी एक साथ नज़र आ रहे थे. हर कोई सेना के शौर्य का गुणगान कर रहा था. अचानक सब कुछ बदल दिखने लगा.

यह बदलाव भारत ने पहले भी देखा था. बात है 26 सितंबर 2016 की जब भारतीय सेना ने उड़ी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की थी व पाकिस्तान में मौजूद आतंकी बेस कैंप को निशाना बनाया था. सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ दिन बाद यानी 4 अक्टूबर को कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने पाकिस्तान पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी करार दिया था.

संजय निरुपम से शुरु हुआ यह सिलसिला केजरीवाल, ममता, चिदंबरम से होते हुए पूरे विपक्ष तक पहुंचा. कुछ लोगों ने सेना के इस कारनामे को फ़र्ज़ी तो कुछ लोगों ने सबूत मांगकर सैनिकों के मनोबल को तोड़ने का प्रयास किया. इसके बाद सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने सेना के शौर्य पर संदेह करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष की आलोचना की थी. आम जनता ‘न्यूट्रल मोड’ पर होती तो है, लेकिन राष्ट्रहित के सामने उसे और कुछ समझ नहीं आता, इसलिए सोशल मीडिया पर जनता ने भी विपक्ष को जमकर ट्रॉल किया गया.

विपक्ष द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी बताया जाना व उसके सबूत मांगे जाने को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया, जिसे समय-समय पर विपक्ष भी तूल देने का काम कर रहा था. जिसका सीधा फायदा भाजपा को 2017 में विधानसभा चुनाव में हुआ. 2017 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए थे जिनमें से चार राज्यों में भाजपा ने सरकार बनाई थी. सेना के सम्मान के साथ खिलवाड़ करना कोई भी सहन नहीं कर पाएगा, इसलिए जनता ने भी अधिकांश सीटों पर भारी वोटिंग के साथ भाजपा को जिताया था. 

विपक्ष का मुख्य मुद्दा सबूत था तो सर्जिकल स्ट्राइक के करीब ढाई साल बाद जून 2018 में सरकार ने सबूत के तौर पर सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो जारी किए थे. लेकिन विपक्ष के हांथों से कई राज्यों की सत्ता तब तक जा चुकी थी.

एक बार फिर सेना ने अपनी ताक़त का प्रदर्शन संपूर्ण विश्व के समक्ष किया है. सेना ने गत महीने की 26 तारीख़ को पाकिस्तान को घर में घुस कर मारा था. इस बार लगा कि विपक्ष सेना के साथ पिछली बार हुई हरक़त को भूल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक बार फिर विपक्ष ने सेना के शौर्य व पराक्रम पर सवाल खड़े कर दिए.

इस बार शुरुआत की बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिन्होंने पिछली बार भी सबूत मांगे थे. इस बार भी सबूत का सिलसिला जारी हुआ जिसका काफ़िला कपिल सिब्बल, सिद्धू, दिग्विजय सिंह से होकर गुजर चुका है लेकिन अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. विपक्ष आए दिन कोई न कोई नया शिगूफ़ा ज़रूर छोड़ देता है जिसको भाजपा आसानी से मुद्दा बना रही है.

ऐसा लग रहा था विपक्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में हुई हार से कोई सबक़ लेगा. लेकिन ऐसा कतई नहीं है. विपक्ष लगातार सेना के शौर्य पर संदेह कर रहा है. कांग्रेस नेताओं द्वारा यह तक कहा जा रहा है कि सेना ने जंगल में ही बम गिरा दिए हैं, किसी आतंकी को नहीं मारा गया है. जबकि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भाई ने खुद स्वीकार किया था कि उनके कैंप पर भारतीय सेना द्वारा हमला किया गया है. यहाँ तक कि भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट कर दिया है कि सेना का काम आतंकियों को मारना है, उन्हें गिनना नहीं. लेकिन विपक्ष लगातार 2016 में हुई गलती दुहरा रहा है. विपक्ष के इन्हीं प्रश्नों को ही भाजपा द्वारा जनता के सामने रखा जा रहा है, व जनता से सेना के सम्मान के संबंध में प्रश्न किया जा रहा है. सेना देश का सम्मान है, तो जाहिर सी बात है कि जनता के पास विपक्ष के लिए क्या मैसेज जा रहा होगा.

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किसी भी दिन किया जा सकता है, विपक्ष को समझना चाहिए कि उसकी गलतियों का सीधा फायदा भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में मिलने वाला है. इसलिए सेना व देश के सम्मान का ध्यान रखते हुए ही राजनीति करनी चाहिए.

फ़ोटो क्रेडिट

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