ओडिशा के 21 लोकसभा क्षेत्रों में से एक, संबलपुर संसदीय क्षेत्र का गठन 1952 के चुनावों से पहले किया गया था और इसमें सात विधान सभा क्षेत्र शामिल थे, जिनमें से एक अनुसूचित जाति वर्ग के लिए और एक एसटी वर्ग के लिए आरक्षित था.
पारम्परिक तौर पर यहाँ BJD और कांग्रेस के कैंडिडेट आपस में सांप सीढ़ी का खेल खलते रहे हैं, लेकिन 2014 के चुनावो में बीजेपी ने दूसरे नम्बर की पार्टी बन कर कांग्रेस के पैरो तले की सीढ़ी खिसका दी, भाजपा के सुरेश पुजारी मात्र 30 हज़ार वोटो के अंतर् से BJD के नागेंद्र प्रधान से हारे, इसके बाद भजपा वहां पर और भी मज़बूत ही हुई हैं.
BJD के नेताओं और मंत्रियो पर गुंडागर्दी का आरोप लगता रहा हैं, जनता भ्रस्टाचार और बेरोजगारी का आरोप भी लगा रही हैं, वहीँ कांग्रेस महागठबंधन के आस में नवीन पटनायक सरकार का कोई विरोध न कर पायी, इसका असर 2017 के पंचायत चुनावो में साफ़ देखने को मिला जब बीजेपी 297 सीट जीत कर दूसरे नम्बर की पार्टी बन गयी और कांग्रेस मात्र ६० सीटों पर सिमट गयी.
संबलपुर में भाजपा इस बार पहली बार जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेगी, वही BJD किसी भी तरह अपना किला बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश करेगी
