पंथ या विचार की सेवा करना सद्कर्म है, स्वयंसेवा के लिए प्रवृत्त होना पुण्य. पुण्य पथ पर निस्वार्थ प्रवृत्त रहना तो आज के युग की दुर्लभ उपलब्धियों में से एक है. आइआइटी मुम्बई के छात्र रहे, संप्रति एक कंपनी के सीएमओ और सेलेब्रिटी ट्वीटकार अनुराग दीक्षित ने स्वयं की प्रेरणा से ऐसी ही एक पहल की है और वह उस पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
उनके पिछले वीडियो ने सोशल मीडिया पर सकारात्मकता के नए आयाम ही स्थापित नहीं किए बल्कि वह प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी कई दिनों तक छाया रहा. उनके दूसरे वीडियो में ‘जुड़ने और जोड़ने’ के क्रम में बात वहीं से शुरु हुई जहाँ यह समाप्त हुई थी. जोश और जज्बा तो उफान पर था ही. पिछले वीडियो ने सामूहिक नॉस्टाल्जिया से शब्दहीन भाव जगाया था. इस बार शब्दों ने उपलब्धियों, आकांक्षाओं, अवसरों और चुनौतियों के विम्ब से युववाणी का प्रतिविम्ब बनाया, ठेंठ युवा अंदाज में. यही कारण है कि यह वीडियो हर तरह की मीडिया में पिछले दो-तीन दिनों से हॉट केक बना हुआ है.
इस वीडियो की संकल्पना अनुराग दीक्षित की है. उन्हे पूरे अंक सिर्फ इस बात के ही मिल जाएंगे कि युवाओं को संबोधित करने के लिए परम्परागत संगीत, लोकधुन या फैशनेबल फिल्मी पैरोडी की जगह उन्होने ओरिजनिल रैप को चुना. teal films के निर्माण में बने इस वीडियो का निर्देशन किया है अनुराग दीक्षित और संदीप फ्रैंसिस ने. युवाओं को कनेक्ट करते अपने शब्दों को रैप में पिरोकर पूरी संकल्पना को सजीव किया है अंकिता सिंह ने. आनन्द वाजपेयी के कर्णप्रिय संगीत में अपने स्वर का जादू बिखेरकर जोरदार समां बांधा है शारवी यादव और आनन्द वाजपेयी ने. Modi Once More की पूरी टीम ने भी वीडियो का तेवर और कलेवर गढ़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
चुनाव अभियानों के साध्य के लिए स्वस्थ साधनों की कमी पर अक्सर विलाप सुनने को मिलता है. इन अभियानों में धन-बल के प्रयोग की बातें भी खूब कही जाती हैं. आज चुनाव अभियानों को स्वस्थ बनाए रखना एक कठिन चुनौती सी प्रतीत होती है. ऐसे में यदि किसी दल के समर्थक स्वयंसेवा से स्वस्थ चुनाव अभियान की पहल करते हैं तो मन में यह आस बंधती है कि हमारे लोकतंत्र को लेकर मानस में अभी बहुत सकारात्मकता शेष है.
अभियान का आरम्भ युवाओं से करना अत्यंत सुखद है, युवाओं से उनकी भाषा और शैली में बात करने का तरीका भी प्रभावकारी. इस वीडियो ने देश की सुरक्षा से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक को बारीकी से बयान कर दिया. इससे युवाओं में गर्व का संचार होना स्वाभाविक है. महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की आकांक्षा पुरजोर दिखी, साथ ही महिला को अबला न कहने की चेतावनी भी. ‘जॉब हमको चाहिए, काम हमको चाहिए, काम के बराबर दाम हमको चाहिए’ रैप में युवाओं के मन की बात थी. भ्रष्टाचार पर कहे शब्द से भी युवा स्वयं को कनेक्ट करेंगे. रैप का अंत ‘एक कदम नमो ने उठाया, एक कदम उठाएंगे हम’ ने सिर्फ यह ही नहीं कहा कि बहुत कुछ हुआ है और बहुत कुछ करना अभी शेष है बल्कि सूक्ष्मता से यह संदेश भी छोड़ गया कि इस परिप्रेक्ष्य में युवाओं की जिम्मेदारी क्या है.
चुनाव अभियान के तहत ‘जुड़ने और जोड़ने’ की ऐसी सकारात्मक पहल जारी रहेगी और अन्य दल भी चुनाव अभियान को इसी तरह स्वस्थ बनाए रखेंगे, इसी आशा और कामना के साथ अनुराग दीक्षित की पूरी टीम को साधुवाद!
