1952 के पहले आमचुनाव के समय से ही करनाल लोकसभा सीट पर मुकाबला जनसंघ/भाजपा और कांग्रेस के मध्य रहा है. इस क्षेत्र में पंजाबी शरणार्थियों की अच्छी संख्या है. भाजपा की हरियाणा के पंजाबियों में अच्छी पैठ मानी जाती है. ब्राह्मण भी इस लोकसभा क्षेत्र में अच्छी तादाद में हैं. यहाँ मराठाओं की भी अच्छी संख्या है जिनके बारे में माना जाता है कि वे पानीपत युद्ध के समय से हरियाणा में बसे हुए हैं.
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करनाल से ही विधायक हैं. वर्तमान में यह सीट भाजपा के हाथों में हैं. पंजाब केसरी के सम्पादक अश्विनी चोपड़ा इस सीट से सांसद हैं. 2014 के मोदी लहर में अश्विनी चोपड़ा लगभग 50% मत प्राप्त कर ढाई लाख से अधिक वोटों से जीते थे. लेकिन पिछले तीन सालों से वे लगातार भाजपा सरकार और भाजपा के पितृपुरुषों के विरुद्ध लिख रहे हैं. ऐसे में यही माना जा रहा कि अश्विनी चोपड़ा कांग्रेस की टिकट पर अगला चुनाव लड़ सकते हैं.
हालांकि करनाल की जनता की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वर्तमान सांसद कभी भी क्षेत्र में आते नही हैं और जनता से उनका सम्पर्क शून्य है. यहाँ जनता सरकार के कामकाज से खुश दिखाई देती है. सरकारी नौकरियों में धांधली खत्म होने से मध्यमवर्ग खुश है. लेकिन व्यापारियों में सरकार के खिलाफ नाराजगी देखने को मिलती है. आने वाले आमचुनाव में यहाँ दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है.
