जब ज्ञान की धारा ज्ञानी के अंदर से प्रवाहित होती है तो उसको हम सहर्ष स्वीकार करते हैं. जब मूर्ख के मुख से निकलती है तो हम आश्चर्य में पड़ते
जब ज्ञान की धारा ज्ञानी के अंदर से प्रवाहित होती है तो उसको हम सहर्ष स्वीकार करते हैं. जब मूर्ख के मुख से निकलती है तो हम आश्चर्य में पड़ते
आज सच में पता चल ही गया कि झूठ के पांव नहीं होते. देश की रक्षा और इसकी सुरक्षा संबंधी डील्स को ले कर जिस भ्रष्टाचार को हम इतने वर्षों