यदि साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है तो पत्रकारिता स्वच्छ जल कहा जाना चाहिए. पत्रकारिता का दायित्व समाज के संघर्ष को प्रदर्शित करना है. पत्रकार राष्ट्र के सरोकार
यदि साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है तो पत्रकारिता स्वच्छ जल कहा जाना चाहिए. पत्रकारिता का दायित्व समाज के संघर्ष को प्रदर्शित करना है. पत्रकार राष्ट्र के सरोकार
एक ही झूठ सौ बार बोलने से सच प्रतीत होने लगता है. नाज़ियों का यह प्रोपगंडा राफेल सौदे को ले कर भी फैलाया जा रहा है. आज ‘द हिंदू’ में
अभी एक महिला की फ़ोटो सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ पाई. किसी ने हमारे व्हाट्सएप्प एकाउंट पर भी यह फोटो फेंकी थी. फ़ोटो में एक महिला खड़ी हैं जिनके शरीर पर
भाग-1 से आगे महिला अधिकारों के लिये एक वामपंथी बहुत संजीदा चेहरा बना लेता है. वह याद दिलाता है कि भारत के कुछ मंदिरों में महिलाओं को प्रवेश नही दिया