ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.. गुलज़ार का यह शेर समाज की एक बहुत बड़ी समस्या बयान करता हैं. लोगो को यह शिकायत है कि उनके
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.. गुलज़ार का यह शेर समाज की एक बहुत बड़ी समस्या बयान करता हैं. लोगो को यह शिकायत है कि उनके