2014 के बाद से ही लगभग सभी जर्नलिस्टों ने एक बात पर गांठ बांध ली थी कि सोशल मीडिया पर कुछ गलत हो रहा है तो वह केवल एक संघी
2014 के बाद से ही लगभग सभी जर्नलिस्टों ने एक बात पर गांठ बांध ली थी कि सोशल मीडिया पर कुछ गलत हो रहा है तो वह केवल एक संघी
पिछले कुछ वर्षों से कुछ चलन ऐसे बन गए हैं जो एक नज़र में शायद सही लगे पर अंततः केवल दोहरे पैमाने वाली औपचारिकता मात्र रह जाते हैं. जैसे एक