Mr. Sinha

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घटिया शायर, फालतू लेखक

उधर भी ‘लगभग’ सब मिले हुए हैं जी

प्रभु श्रीराम का दरबार सजा था. अंगद, सुग्रीव व हनुमान इत्यादि का बेसब्री से इंतजार हो रहा था. सीता मैया के खोज में गए सारी टुकड़ियां वापस आ गयी थी.