योगी का विपक्ष पर निशाना

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है. विपक्ष हर बार देश के प्रत्येक मुद्दे को प्रधानमंत्री से जोड़ कर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करता है. यहां तक कि राष्ट्रीय विषयों पर भी विपक्षी नेताओं को सिर्फ़ और सिर्फ वोट बैंक की चिंता रहती है.

राजनीतिक दल चुनावी सभा में भी देश विरोधी बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं. विरोधी दलों के बयानों का जवाब देने के लिए सामने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. योगी आदित्यनाथ ने गाज़ियाबाद में एक कार्यक्रम में विपक्ष पर निशाना साधा व बालाकोट हवाई पट्टी का सबूत मांगने वाले विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि पुलवामा के बाद के जवाबी हमले में केवल दो गुट पीड़ित थे – पहला पाकिस्तान और दूसरा विपक्ष.

पाकिस्तान जब आतंकवादियों के शवों की गिनती कर रहा था, उस समय हमारा विपक्ष हवाई हमले के बारे में सवाल पूछ रहा था. यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एक अन्य रैली में श्री योगी ने कहा यूपीए सरकार द्वारा आतंकवादियों को ‘बिरयानी परोसा जाता था’ और आतंकवाद से निपटने के लिए नरम रुख था. उन्होंने कहा कांग्रेस मसूद अजहर के बाद ‘जी’ जोड़कर उन्हें सम्मान देती है. लेकिन भाजपा के पास आतंकवादियों से निपटने के दो ही तरीके हैं गोली या बम.

पाकिस्तान द्वारा किए गए किसी भी आतंकी हमले का तत्कालीन सरकारों द्वारा न तो जवाब दिया जाता था और न ही कोई अन्य कार्रवाई की जाती थी. लेकिन अब वर्तमान सरकार द्वारा आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सरकार ने सेना को खुली छूट दे रखी है, आतंकियों को देखते ही गोली मारने के ऑर्डर सेना के पास हैं.

पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा आतंकियों को सीमा से ही वापस भेज दिया जाता था. यही कारण है कि अब कश्मीरी घाटी में हर रोज़ आतंकी ढेर हो रहे हैं, जबकि पहले खबर आती थी कि सैनिक ही शहीद हो रहे हैं.

गत दिवस योगी आदित्यनाथ के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार आतंकियों व आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों को के प्रति सख़्त रुख अख्तियार करेगी. साथ ही, श्री योगी ने इस बयान के माध्यम से जनता को यह संदेश भी दिया कि जिन लोगों की बयानबाजी से पाकिस्तान को खुशी होती है, या जो लोग पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं उनके साथ आगामी चुनाव में क्या करना उचित होगा.

बहरहाल, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष बैकफुट में है. स्थिति यह है कि कांग्रेस के सहयोगी दल भी कांग्रेस का मखौल उड़ा रहे हैं,जबकि पुराने सहयोगी दलों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से भी इंकार कर दिया है.

अधिकांश विपक्षी दलों को कुछ क्षेत्रों में प्रत्याशी ढूंढ़ने करने में भी समस्या हो रही है. यहां तक कि विपक्षी दलों की विचारधारा पर प्रश्नचिन्ह लगाकर दिग्गज नेता हर रोज़ पार्टियां छोड़ रहे हैं. अब देखना यह होगा कि बिखरा हुआ विपक्ष जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व द्वारा हर मोर्चे में बैकफुट पर ढकेल दिया जाता है, आगे क्या नीति व रणनीति अपनाता है.