पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक ट्वीट कर के भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के नेशनल डे पर बधाइयों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद!
इमरान खान का यह ट्वीट भारत में कई लिबरलो के ऊपर वज्र बन कर टूटा है. वैसे उनके ऐसे व्यवहार को देख कर आश्चर्य सभी को होता है. देश के लिबरल लोग तो स्वयं को सर्वसमावेशी कहते नहीं थकते हैं. ऊपर से पाकिस्तान के प्रति बाहुबल से अधिक सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल करने के यह पक्षधर सदैव से रहे हैं. लेकिन इनकी यह बेचैनी समझ से परे है.
यह पूरा बवाल एक ही धुरी पर नाचता है कि ‘पाकिस्तान से बात क्यों की?‘ उनके तर्क कई जगह सही भी लगते हैं. उनका यह तर्क सही है कि जब पाकिस्तान से बातचीत बंद है तो इस चिट्ठी का क्या मतलब था. उनकी यह बात भी सिरे से खारिज नहीं की जा सकती है कि पाकिस्तान के लिए एक पॉलिसी क्यों नहीं निर्धारित की जा रही है.
लेकिन इन सभी बातों के मध्य एक बात भुलाई जा रही है. पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है. भले ही एशिया के परिवार का वह सबसे नालायक सदस्य हो, लेकिन इससे उसके भौगोलिक स्थितियों में कोई अंतर नहीं पड़ता है. आश्चर्य की बात तो यह है कि इसकी निंदा हम उन लोगों के द्वारा भी सुन रहे हैं जो ‘नेहरूवियन आइडियोलॉजी’ के प्रखर समर्थक हैं.
बात रही उस चिट्ठी की, तो भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय से ऐसी चिट्ठियां उन सभी देशों को जाती हैं जिनसे भारत के ‘डिप्लोमेटिक रिलेशन्स’ हैं. यदि हमारा लिबरल समाज चाहता है कि उनको खत्म कर दिया जाए, तो हम भी इसके पक्षधर हैं. परंतु फिर उसके बाद ‘अमन की आशा’ वाली ब्रिगेड की गारेंटी कौन लेगा? चूंकि पाकिस्तान के संदर्भ में हमारे देश के भीतर एक सॉफ्ट कॉर्नर रखने वालों का समूह सदैव से सक्रिय रहा है. वो पाकिस्तान को भारत के सॉफ्ट पावर से हराने के पक्ष में रहे हैं.
इमरान खान का यह ट्वीट उसी पाकिस्तानी शरारत का एक हिस्सा है जिसको भारत सदैव से झेलता आ रहा है. लेकिन एक ज़िम्मेदार देश होने के नाते हम अपनी जिम्मेदारियों के भार को समझते हैं. हमारे देश के कईयों का भी यही कहना है कि नरेंद्र मोदी की सरकार पाकिस्तान पॉलिसी बनाने में कहीं न कहीं नाकाम हुई है.
उरी और पुलवामा जैसी घटनाओं के बाद उनका यह क्रोध भली भांति समझा जा सकता है. फिर भी जोश में होश नहीं खोना चाहिए. रणनीतिक, कूटनीतिक और राजनैतिक स्तर पर हमसे पिछड़ चुका पाकिस्तान अब भावनात्क रूप से हमें निशाने पर ले रहा है.
हमें अपनी भावनाओं के ज्वारभाटे को संयम में रखना होगा. दूसरी तरफ देश के नेतृत्व को भी समझना होगा कि इस समय पाकिस्तान के संदर्भ में हर कदम बेहद ही सावधानी से रखना होगा. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की इस शरारत को देखने के बाद तो भारत को और सजग रहने की आवश्यकता है.

1 Comment
ना, मैं प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं । या तो आप दुश्मनी ही निभा लीजिए या फिर दोस्ती। यह बैलेंसिंग एक्ट बिल्कुल भी नहीं चलेगा।