जम्मू -कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर 14 फरवरी 2019 को हुए सबसे घातक आतंकी हमले ने देश के गुस्से और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ नफरत को और भड़का दिया. शोक संतप्त राष्ट्र ने 40 बहादुर जवानों के शवों को अपनी आंखों के समक्ष आते हुए देखा था. गंभीर रूप से घायल जवानों के गहरे घावों ने हर राष्ट्रवादी के हृदय को छलनी कर दिया था.
पाक स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा आतंकवाद के इस कृत्य के बाद सभी राजनीतिक दलों (हालांकि शुरुआत में) सहित पूरा देश शोक में एकजुट हो गया. भारतीय लोगों की प्रतिक्रिया यह रही है कि इस दुस्साहस का बदला लेने के लिए जनता द्वारा सरकार से मजबूत कार्रवाई की उम्मीद की जाने लगी. मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने परिपक्व और निर्णायक प्रतिक्रिया दी. प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा.
नतीजतन, काउंटर एक्शन कई स्तरों पर शुरू हुआ क्योंकि सरकार ने शुरू से ही सतर्कता, निर्णायकता और निर्भीकता का परिचय दिया था. विविध मोर्चों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के प्रयास – सैन्य, आर्थिक, राजनयिक और अन्य दबाव के रूप में शुरू हो गए. भारतीय प्रधानमंत्री की घोषणा यह बात बताने के लिए पर्याप्त थी कि अब भारत अनंत काल तक अपने जवानों का खून बहता हुआ नहीं देख सकता.
भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई करने की पूरी आजादी दी गई . आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान से आयातित उत्पादों पर 200% आयात शुल्क लगाया गया . भारत ने दो दशक पहले पाकिस्तान को दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा भी वापस ले लिया. भारतीय किसानों, निर्यातकों, व्यापारियों, फिल्म निर्माताओं, खिलाड़ियों और अन्य हितधारकों ने पाकिस्तान पर आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों की घोषणा की क्योंकि वे सशस्त्र बलों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े थे.
घरेलू मोर्चे पर कश्मीर के पाक समर्थक अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली गई. जमात-ए-इस्लामी, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट आदि कई संगठनों पर छापे मारे गए. कई गिरफ्तारियां की गईं, जिनमें हाई प्रोफाइल अलगाववादी नेता व आतंकी यासीन मलिक और अन्य शामिल थे. पाकिस्तान समर्थक कश्मीरी समाचार पत्रों, ग्रेटर कश्मीर और कश्मीर रीडर पर सरकारी विज्ञापनों को छापने पर रोक लगा दी गयी . ये समाचार पत्र विभिन्न मुद्दों पर पाकिस्तान के मुखपत्र के रूप में काम कर रहे थे. सरकारी विज्ञापनों को वापस लेने से उनके राजस्व में भारी गिरावट आई है.
अंतिम जवाबी कार्रवाई 26 फरवरी 2019 की रात की गई जब 12 लड़ाकू मिराज 2000 जेट विमानों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया और इस्लामाबाद से लगभग 100 किलोमीटर और एलओसी से 80 किलोमीटर दूर बालाकोट में स्थित एक विशाल आतंकी प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया. यह प्रशिक्षण केंद्र एक विशाल परिसर था, जहाँ हथियारों का उपयोग, IED बनाने और उपयोग करने, सुरक्षा बलों पर हमला करने के तरीके, आत्मघाती बम के रूप में प्रशिक्षण और जेहादी मानसिकता के युवाओं के ब्रेनवॉश करने का प्रशिक्षण दिया जाता था. पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि उसके वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी आतंकवादियों का ब्रेनवॉश कर उनको हमले के लिए प्रशिक्षित किया करते थे.
इस परिसर में एक समय में लगभग 10,000 आतंकवादियों को समायोजित करने और प्रशिक्षित करने की क्षमता थी जहाँ एक मदरसा, एक मस्जिद और नियंत्रण कक्ष थे और इसका उपयोग जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तान से काम करने वाले अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा किया जाता था.
बालाकोट की कार्रवाई रणनीतिक रूप से कई मायनों में महत्वपूर्ण है. भारत ने 1971 के युद्ध के बाद पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ वायु शक्ति का इस्तेमाल किया. इस बार भारतीय वायुसेना ने न केवल LoC पार किया अपितु पाकिस्तान के काफी अंदर घुस कर घटना को अंजाम दिया, जो भारतीय वायु सेना की जीवटता का सर्वोच्च उदाहरण है. यह भी उल्लेखनीय है कि पूरा ऑपरेशन इतनी दक्षता के साथ किया गया कि अपना लक्ष्य पूरा करने के बाद लड़ाकू विमान सुरक्षित वापस आ गए. विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई एक और उदाहरण है कि कैसे पाकिस्तान को बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण बिना शर्त लड़ाकू पायलट को 60 घंटे के भीतर रिहा करना पड़ा. जेनेवा संधि तो पहले भी थी परंतु भारतीय वायुसेना के कई अधिकारियों को पाकिस्तान की न केवल बर्बरता झेलनी पड़ी अपितु कुछ तो आज तक लौट कर नहीं आए हैं.
पुलवामा हमले के बाद दुनिया के नेताओं की प्रतिक्रिया, भारत का मज़बूत स्टैंड और विश्व शक्तियों का भारत को समर्थन कर पाकिस्तान की निंदा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. यह वर्तमान एनडीए सरकार के तहत भारत की एक नई शक्ति का परिचय कराता है. अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन, शिया ईरान, सुन्नी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से लेकर विश्व के अनेक नेताओं की प्रतिक्रिया भारत के लिए कूटनीतिक रूप से उत्साहजनक रही है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने टिप्पणी की, “संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसका एकमात्र लक्ष्य इस क्षेत्र में अराजकता, हिंसा और आतंक को रोकना है, पाकिस्तान से अपनी धरती पर सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों को प्रदान किए गए समर्थन और सुरक्षित पनाहगाह को तुरंत समाप्त करने का आह्वान करता है.”
भारत में रूसी संघ के दूतावास ने कहा, “हम सभी रूपों में आतंकवाद की निंदा करते हैं और बिना किसी दोहरे मानकों के निर्णायक और सामूहिक प्रतिक्रिया के साथ इन अमानवीय कृत्यों का मुकाबला करने की आवश्यकता को दोहराते हैं.”
सऊदी अरब की प्रतिक्रिया भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने हाल ही में संपन्न ओआईसी बैठक में भारतीय विदेश मंत्री को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ओआईसी इस्लामिक देशों का एक समूह है जिसने पारंपरिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया है. पाकिस्तान इस बात को लेकर इतना परेशान हो गया कि उसने सऊदी पर भारत को बैठक में न बुलाने का दबाव बनाया और बात न मानने पर बैठक का बहिष्कार करने की धमकी दी.
नरेंद्र मोदी यूपीए -2 के मनमोहन सिंह नहीं हैं, जिसके दौरान सरकार में स्पष्ट रूप से दो सत्ता केंद्र मौजूद थे. आज का भारत राष्ट्रहित में साहसिक निर्णय लेने में सक्षम है. पुलवामा के बाद मोदी की टिप्पणियों और उनके निर्भीक निर्णयों ने भारत को कूटनीतिक जीत दिलाने में मदद की है . मोदी सिर्फ आतंकवाद की निंदा करने तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि मोदी के नेतृत्व में ठोस जवाबी कार्रवाई के माध्यम से आश्चर्य कराने की क्षमता भी प्रदर्शित की है. अगर उरी में यह अप्रत्याशित सैन्य सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में सामने आया था, तो बालाकोट में यह वायु सेना के अत्यंत घातक प्रतिशोध के रूप मे सामने आया.
परवेज मुशर्रफ ने इसी भारतीय सैन्य शक्ति के बारे में बात करते हुए कुंद शब्दों में कहा: “यदि पाकिस्तान एक परमाणु बम से हमला करता है, तो भारत हमें 20 के साथ खत्म कर देगा.”
भारत की मजबूत सरकार के इस संदेश का भविष्य में पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों और अन्य देशों के साथ संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा.
पाक सेना या पाक नागरिकों को नहीं बल्कि केवल एक आतंकी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाकर भारत ने एक यह बात विश्व बिरादरी के समक्ष रख दी है कि उसकी लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है, पाकिस्तान या उसके लोगों के नहीं. जवाबी कार्रवाई ने एक शक्तिशाली संदेश भेजा है कि नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत के पास आवश्यकता होने पर उचित कार्रवाई करने की इच्छा शक्ति और क्षमता दोनों हैं.
आर्थिक रूप से, सैन्य रूप से और राजनीतिक रूप से पाकिस्तान भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है, लेकिन पाकिस्तान विदेशी नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करता आया है और छद्म युद्ध छेड़ता रहा है. बालाकोट जवाबी हमले के माध्यम से भारत ने तथाकथित संयम सिद्धांत के आधार पर प्रहार किया है जो कहता है कि दोनों देश परमाणु शक्तियां हैं. अतः भारत को प्रतिशोध में संयम रखना चाहिए. द्विपक्षीय शांति बनाए रखने के लिए पारंपरिक रूप से भारत ने ही बलिदान दिए हैं. पाकिस्तान तो खुद भारत को आतंकी गतिविधियों के माध्यम से बार-बार ज़ख्म दे ही रहा है.
26/11 के मुंबई हमले और पठानकोट आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकवादियों के उनमें शामिल होने के सबूत दिए थे, लेकिन बाद में पाकिस्तान द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया गया था, परंतु इस बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़े पाकिस्तान ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख अजहर मसूद वास्तव में पाकिस्तान में था.
चूँकि पाकिस्तान का आदतन झूठ बोलने का इतिहास रहा है, इसलिए इसकी भूमि से आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए बहुत अधिक कार्रवाई करने की उम्मीद करना अनुचित होगा. फिर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने अपनी धरती पर आतंकी समूहों और बुनियादी ढांचे पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
पाकिस्तान आंतरिक दबाव में भी लगता है क्योंकि उसे आतंकी नेटवर्क को बचाने के लिए फंड दिया जाता है. इसने भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक में आतंकी केंद्र को हुए नुकसान को छुपाने के लिए हर हद तक झूठ बोला है. आतंकवादियों की संख्या और यहां तक कि पाक सेना के एक पायलट की मृत्यु के बारे में भी पाकिस्तान ने झूठ बोला. भारत द्वारा जिस पूरे क्षेत्र पर हमला किया गया है, वहाँ पर किसी भी मीडिया को जाने की अनुमति पाक द्वारा नहीं दी गयी है. क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा भी बंद कर दी गई ताकि सोशल मीडिया में वास्तविकता सामने न आ सके. पाकिस्तान सरकार और सेना द्वारा इन सभी उपायों के बावजूद सूत्रों द्वारा यह बताया गया है कि तबाह हुए आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र से आतंकवादियों के शवों को पेट्रोल के साथ जला दिया गया है और पड़ोसी नदी कुन्हार में फेंक दिया गया है. बालाकोट स्ट्राइक में मृतकों की वास्तविक संख्या 263 बताई गई है.
भारत पाकिस्तान क्षेत्र में प्रवेश करने और एक आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर बमबारी करने के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को समझा सकने में सफल रहा है कि यह पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को शरण देने के लिए एक ‘गैर-सैन्य’ कार्रवाई थी. ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि भारत ने संपूर्ण घटनाक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है.
पुलवामा के बाद आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का भारत को अभूतपूर्व समर्थन और आतंक को रोकने के लिए पाकिस्तान को सीधी चेतावनी, भारत की नई प्राप्त कूटनीतिक ताकत के स्पष्ट संकेतक हैं. मोदी के विदेशी दौरों से भारत ने यह प्राप्त किया है.
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान से संचालित जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ सार्थक कदम को प्रोत्साहित करने के लिए पाकिस्तानी एफएम कुरैशी के साथ बात की.”
विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी किया, “उन्होंने (अमेरिकी समकक्षों) सहमति व्यक्त की कि पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने और अपने क्षेत्र में सभी आतंकवादी समूहों को सुरक्षित आश्रय देने से इनकार करने के लिए ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है. उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि जो लोग किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन करते हैं या उन्हें प्रोत्साहित करते हैं , उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.“
पुलवामा की प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कई संदेश भेजे हैं कि अब भारत के साथ रोज़मर्रा का खिलवाड़ नहीं चलेगा . पाकिस्तान की कोई भी दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई भारत की मजबूत जवाबी कार्रवाई को आमंत्रित करेगी. अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान पर आतंकियों को समर्थन देने के विरुद्ध तत्काल और कारगर उपाय करने के लिए दबाव डाला है. यह अनिश्चित है कि पाकिस्तान वास्तव में ऐसा करेगा , फिर भी यदि पाकिस्तान को अपना अस्तित्व बचाए रखना है तो अंततः विदेश नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग रोकना होगा और अपनी धरती से आतंक के बुनियादी ढांचे को खत्म करना होगा.
इसके साथ ही, भारत में पाकिस्तानी आतंकवादियों और उनके समर्थकों के लिए एक मजबूत संदेश भी गया है कि वे मोदी से दोबारा सत्ता में आने के बाद कठिन दिनों की उम्मीद कर सकते हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों में अत्यधिक संभावित भी लगती है.
दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.
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