छत्रपति शिवाजी टर्मिनल हादसा दुःखद।

मुंबई में छत्रपति शिवाजी टर्मिनल (सीएसटी) के पास गुरुवार शाम फुटओवर ब्रिज गिरने से ५ लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि तीस से अधिक घायल हो गए हैं. यह सीएसटी के प्लेटफार्म नंबर एक को बीटी लेन से जोड़ता था. ग़नीमत रही कि जिस वक़्त यह ओवरब्रिज टूटा, उस वक़्त ब्रिज के नीचे से कोई ट्रेन नहीं गुज़र रही थी, अन्यथा हादसे के परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे.

हादसे की मुख्य वजह का अब तक पता नहीं चल सका है. खबरों के अनुसार करीब 30 साल पुराने इस ओवर ब्रिज पर निर्माण कार्य भी चल रहा था. चश्मदीदों के अनुसार जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक़्त ओवर ब्रिज पर काफ़ी भीड़ थी. इस हादसे की एक वजह अधिक भीड़ को भी माना जा सकता है. 

इस ब्रिज का इस्तेमाल सबसे अधिक सीएसटी रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले लोग करते हैं. लेकिन इस हादसे पर रेलवे ने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है कि इस ओवर ब्रिज की जिम्मेदारी बीएमसी की है. हैरानी तो इस बात की है कि बीएमसी का दफ्तर भी इस ब्रिज के बिल्कुल पास में ही है. उसके बावजूद बीएमसी की किसी भी रिपोर्ट में इस ओवर ब्रिज को खतरनाक नहीं बताया होगा, अन्यथा इसे बंद कर दिया गया होता. साफ है कि लापरवाही बरती गई है. 

इस हादसे पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री विनोद तावड़े से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ब्रिज का एक स्लैब गिरा है. रेलवे और बीएमसी इसकी मेंटनेंस के बारे में जांच करेंगे. ब्रिज खराब कंडीशन में नहीं था. इसमें छोटी-मोटी रिपेयरिंग की जरूरत थी. काम पूरा नहीं हुआ फिर भी इसे चालू रखा गया था. इसके बारे में भी जांच की जाएगी. इस हादसे पर दुख जाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी कहा कि उनकी कमिश्नर से बात हुई है. इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी. जो भी दोषी होंगें उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी. साथ ही सीएम श्री फडणवीस ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये व घायलों को 50-50 हज़ार रुपए राहत राशि देने की घोषणा भी की.

इस हादसे के बाद गत शाम जो हुआ वह तारीफ़ के लायक था. दरअसल जब भी कहीं कोई हादसा होता है वहाँ हादसे को देखने वालों की भीड़ लग जाती है जो बचाव कार्य में कई बार व्यवधान उत्पन्न कर देती है. लेकिन यहाँ ऐसा नहीं हुआ. जबकि भीड़ तो यहाँ भी थी. लोगों ने यहाँ एनडीआरएफ व अन्य बचाव दल के आने से पूर्व ही बचाव कार्य आरंभ कर दिया था. खबरों के अनुसार अधिकांश घायलों को यहाँ मौजूद लोगों ने ही मलबे से निकाल कर नज़दीकी अस्पतालों में पहुंचाने का प्रयास किया गया. साथ ही पुलिस व प्रशासन को हादसे की सूचना भी दी. मुम्बई के लोगों द्वारा हादसे के बाद किया गया बचाव कार्य प्रेरणादायक है.

अब देखना यह है कि इस हादसे का असली ज़िम्मेदार कौन है और जाँच से कब वह सामने आता है व उसके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई होती है. यदि कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इस तरह के हादसे होते रहे हैं और शायद होते भी रहेंगे.

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