जो कार्यकर्ता मोदी बोलता था, वो पीएम मोदी कर के दिखाता है!

“…और इस यात्रा की सफलता से…आतंकवादी बौखलाये हुए हैं. लाल चौक पर पोस्टर लगे हुए हैं…जो भी लाल चौक पर तिरंगा लहराएगा, आतंकवादी उसे इनाम देंगे. मैं उनको बता देना चाहता हूं कि 26 तारीख को…बस दो ही दिन बाद हम लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे. हम दिखाएंगे कि किसने माँ का दूध पिया है”

ये किसी फिल्म का डायलाग नहीं है. आज से 35 साल पहले कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी का भाषण है. उस समय नरेंद्र मोदी कोई बड़े नेता नहीं थे. वो बस पार्टी के एक कार्यकर्ता थे. कश्मीर की बिगड़ी हुई स्थितियों को उन्होंने बखूबी देखा था. उस समय जब कश्मीर की गलियों में भय और आतंक तांडव कर रहा था, तब भारतीयों को वहां जा तिरंगा फहराने से रोका जाता था. उसी समय नरेंद्र मोदी ने एक संकल्प लिया था…आतंकवाद से लड़ने का…इसको खत्म करने का अटूट संकल्प. ये संकल्प किसी भूमि पर अपने अधिकार का नहीं था, बल्कि करोड़ो की आबादी वाले देश के स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में इसको लिया गया था. आतंकवाद के सामने न झुकने की भारत की प्रतिज्ञा ही इसका आधार थी.

आज 35 साल बाद जब हम भारत को देखते हैं तो हम कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी की उस शपथ को फलित होते देखते हैं. नरेंद्र मोदी के 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान भारत में एक भी आतंकवादी हमला नहीं हुआ है. अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि पुलवामा और उरी क्या थे? देश की जनता को यह समझना होगा कि कश्मीर की स्थितियों में बहुत अंतर है. इन दोनों ही हमलों के बाद भारत की तरफ से जो जवाब पाकिस्तान को गया है, वो एक बड़ा संदेश था.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एयर स्ट्राइक भारत की सैन्य कार्यवाहियाँ ही नहीं थी, बल्कि भारत की विश्व पटल पर साख को बढ़ाने वाली दो घटनाएं थी. इसमें भारत के बाहुबल का ही परिचय नहीं दिया गया, अपितु भारत के सम्मान की भी रक्षा की गई. यह संदेश था कि कोई यदि यह सोचता है कि 26/11 जैसे हमले झेलने के बाद भी भारत जैसा देश अपनी रक्षा के लिए कदम नहीं बढ़ाएगा, तो वह एक भारी भूल कर रहा है. दुनिया में भारत का सम्मान सिर्फ अहिंसावादी राष्ट्र के रूप में न हो, बल्कि मुँहतोड़ जवाब देने वाले राष्ट्र के रूप में भी हो. इसी लक्ष्य को नरेंद्र मोदी ने साध लिया है.

इन 5 सालों में कहीं भी न तो 26/11 जैसा हमला हुआ, और न ही निर्दोष भारतवासियों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी. यह उसी संकल्प का एक परिणाम है. आंख मिलाकर बात करने वाले जिस संकल्प को प्रधानमंत्री में लिया था, भारत आज वो देख रहा है.

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