पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विश्व भर में मनाया गया और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर वृहद चर्चा हुई. इसमें बड़ा मुद्दा था महिला और पुरुष के औसत वेतन में अंतर. कॉर्पोरेट दुनिया में यह अंतर काफी कम हो रहा है पर खेलकूद की दुनिया में यह अंतर यथावत है. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वरिष्ठ पुरूष क्रिकेटरों का वार्षिक अनुबंध 7 करोड़ रुपये का है जबकि वरिष्ठ महिला क्रिकेटर का केवल 50 लाख रुपये का. नारीवादियों ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की इस भेदभाव के लिए तीख़ी आलोचना की है.
महिला क्रिकेट मैच पुरूष क्रिकेट मैच जितने लोकप्रिय नहीं है. जहाँ महिला क्रिकेट मैच मुफ्त होने पर भी दर्शक बड़ी मुश्किल से मिलतें हैं, वहीं पुरुषों के मैच में स्टेडियम महँगे टिकट के बावजूद खचाखच भरे होते हैं. इसकी वज़ह से महिला क्रिकेट को प्रायोजक भी आसानी से नहीं मिलते. प्रायोजकों की कमी के कारण पिछले साल तक तो महिला क्रिकेट मैच का लाइव प्रसारण तक नहीं हो पाता था जो क्रिकेट बोर्ड के लिए रेवेन्यू का सबसे बड़ा स्रोत है.
BCCI अपनी रेवेन्यू का 26% हिस्सा क्रिकेटरों के वेतन में इस्तेमाल करता है जो रेवेन्यू पूरी तरह पुरुष क्रिकेट मैच से ही मिलती है. जबकि महिला क्रिकेट मैच को अनुदान देना पड़ता है. पिछले कुछ सालों से क्रिकेट बोर्ड ने महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए काफी मेहनत की है. इसमें सबसे अहम है ब्रॉडकास्टर्स से बेहतर डील जिससे वो महिला क्रिकेट मैच का भी लाइव प्रसारण करें और महिला क्रिकेट की मीडिया में मार्केटिंग हो. इस कदम का असर भी दिख रहा है. कुछ समय पहले तक उत्साही क्रिकेट फैन्स को भी महिला क्रिकेटरों के नाम तक नहीं पता होते थे. आज मिताली राज, झूलन गोस्वामी, स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर जाने माने स्टार हैं.
आलोचकों की दूसरी बड़ी शिकायत है कि बोर्ड IPL पर पानी की तरह पैसे बहाता है पर महिला क्रिकेट के लिए ऐसी कोई प्रतियोगिता नहीं है. ऐसी प्रतियोगिता में 7-8 क्रिकेट टीम होती है और हमारे पास इतनी टीम के लिए पर्याप्त युवा खिलाड़ी ही नहीं है. पिछले साल झूलन गोस्वामी के चोटिल होने पर 6 साल से अंतरराष्ट्रीय खेल से बाहर रुमेली धर को टीम में शामिल करना पड़ा था क्योंकि हमारे पास सक्षम युवा खिलाड़ियों का विकल्प ही नहीं था. इसलिए जब तक हमारा घरेलू क्रिकेट का ढांचा मजबूत नहीं हो जाता, महिला IPL मुमकिन ही नहीं है.
वेतन का यह अंतर सिर्फ भारत में है, ऐसा नहीं है. अन्य देशों में भी यही हाल है. इंग्लैंड में वार्षिक रिटेनर फ़ीस वरिष्ठ पुरुष क्रिकेटर के लिए 900,000 पौंड है जबकि महिला क्रिकेटर के लिए 50000 पौंड. ऑस्ट्रेलिया में यह क्रमश: 816, 000 और 72000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है. इस हिसाब से भारतीय महिला क्रिकेटर दुनिया में सर्वाधिक वार्षिक वेतन पाती हैं.
महिला और पुरुष को समान अवसर मिलने चाहिए पर हम समान परिणाम और परिमाण की आशा नहीं रख सकते. बोर्ड को महिला क्रिकेटरों को प्रशिक्षण और प्रचार के लिए वो सभी सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए जो पुरुष क्रिकटरों को मिलती है. इस दिशा में ठोस कदम उठाएं भी जा रहें हैं.
एक अरसे बाद महिला क्रिकेटर जनता की नज़रों में हैं, बेहतर वेतन के साथ साथ खिलाड़ियों पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव भी बढ़ रहा है. अच्छे प्रदर्शन से लोकप्रियता भी बढ़ेगी और कमाई भी. लेकिन जब तक महिला क्रिकेट पुरुष क्रिकेट जितना लोकप्रिय नहीं होता है, तब तक समान वेतन की अपेक्षा अतार्किक है.
