फिटनेस का फलसफा

आजकल 6-पैक एब्स काफी प्रचलन में हैं. इसके लिए मैं हमारे बॉलीवुड के अभिनेताओं का खास तौर पर शुक्रिया अदा करता हूँ.  स्टीव जॉब्स ने जैसे हमें सिखाया कि iPhone की ज़रुरत सारे विश्व को और खास तौर पर सेल्फी प्रेमियों को है, वैसे ही बॉलीवुड अभिनेताओं  ने यह सिखाया कि चरित्र के विकास से अधिक 6-पैक एब्स के विकास की जरुरत आज की युवा पीढ़ी को है.

आप जानते हैं कि आपके थुलथुल शरीर के अंदर एक शानदार एब्स कहीं छुपा हुआ है. उसे बाहर निकालने के लिए आप ने यूट्यूब का हर एक कोना छान मारा है. एब्स बने या नहीं पर आप एक फिटनेस एक्सपर्ट बन चुके हैं और फिटनेस सलाह ऐसे बाँट रहे हैं, जैसे सलाह नहीं बल्कि दीपावली की  सोनपापड़ी हो.

मैं भी आपकी तरह एक फिटनेस एंथुजिअस्ट और एक्सपर्ट  हूँ. मुझे भी फिटनेस टिप्स देना अच्छा लगता है. मैं भी आपके तरह हर साल जिम में नाम लिखा आता हूँ. आपको और मुझे यह ज्ञात है कि हमारा अनुभव विज्ञान के सिद्धांतो से कई गुना बेहतर है. एनाटॉमी चाहे ये माने कि “ओवर हेड प्रेस” से कंधो का व्यायाम होता है, पर हम यही मानेंगे कि उससे हमारे घुटनो पर असर पड़ता है. मुझे खुशी है कि आपका घुटना और दिमाग दोनों सही सलामत हैं.

कुछ तथाकथित फिटनेस एक्सपर्ट, जैसे पि डी मांगन और डॉम डि-ऑगस्टिनो आज कल सरासर गलत बात बता कर सबको गुमराह कह रहे हैं. सबसे पहले श्रीमान मांगन ने कहा कि उपवास से हमारे शरीर को काफी लाभ होता है, जैसे मोटापे में कमी, रोग प्रतिरोधक शक्ति व मेटाबॉल्ज़िम का बढ़ोतरी, इंसुलिन संवेदनशीलता में संतुलन इत्यादि. मांगन को लगता है कि इससे सीधे तरीके से कई बीमारी ठीक हो सकते हैं. उनकी माने तो शरीर में वसा या फैट का काम ही यही है कि जब खाना न मिले तब शरीर को ऊर्जा देना. उपवास करके उस फैट का प्रयोग कर लेना चाहिए, जिससे मोटापे में कमी तो आएगी ही और उसके साथ साथ संज्ञानात्मक क्रिया में भी काफी बृध्दि होती है. ये सब उनका मानना है पर महोदय, केवल आप और हम जानते हैं कि दिन में ६ बार खाना और बीच में चाय और पकोड़े का सेवन एक अच्छे सेहद की नीव हैं.

मांगन जी ने यह भी कहा कि चीनी का सेवन करना नहीं चाहिए क्योंकि यह काफी हद तक अप्राकृतिक है. दुनिया में किसी भी फल में इतनी मात्रा में चीनी है ही नहीं, और फल में थोड़े चीनी के साथ काफी फाइबर होता है जो पेट साफ़ रखने में सहायक होता है और चीनी में फाइबर का फ भी नहीं. परन्तु महोदय, बात तो यह है कि मांगन जी यह जानते ही नहीं कि ग्रीन-टी ३ चम्मच चीनी के साथ सुबह सुबह पीना कितना लाभप्रद है. इनकी मानें तो इंसान को मवेशी के तरह दिन भर चरना नहीं चाहिए. इससे शारीरिक व्यवस्था में समस्या शुरु होती है. मैं और आप यह जानते हैं कि हमें चरने में कितना मजा आता है. हम तो दिन में दिवाचर और रात को निशाचर बन जाते हैं.

डॉम डि-ऑगस्टिनो महाशय का शोध भी इसी विषय पर है. वे कहते हैं कि कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करने से सेहद में काफी सुधार आता है. सुनने में आया है कि उनका तरीका इतना कारगर है कि उनको अमरीकी नौसेना में नियुक्त जवानों पर इसका प्रयोग करने को कहा गया है. हास्यास्पद है यह. आपको भी पता है कि हमारे कक्षा 5 के विज्ञान पुस्तक में यह लिखा था कि कार्बोहाइड्रेट के बिना इंसान में ऊर्जा नहीं रहती.  कार्बोहायड्रेट, ये मांगे मोरे, और बिन चीनी ये दिल है कि मानता नहीं.

यह तो रही विदेश की बात, थोड़ा देश के तरफ भी ध्यान दें. माना जाता है कि उपवास की प्रथा भारत के लिए कोई नया विषय नहीं है. प्राचीन काल से सनातनी विभिन्न तिथि त्यहारों में उपवास रखते आए हैं. यह कईयों का मानना है कि उपवास से तन और मन दोनों की शुद्धि होती है. साधु संतो की माने तो उपवास इतना कठिन भी नहीं है. सुनने में तो यह भी आया है कि प्रधानमंत्री जी भी नवरात्र के ९ दिन कुछ नहीं खाते, केवल जल का सेवन करते हैं. यह तो केवल एक संयोग ही है कि वे ६८ साल में उमर में भी इतने ऊर्जावान हैं. आप इनके झांसे में न आएं. ये साधु संत और मोदी जी आपके और मेरे तरह फिटनेस एक्सपर्ट थोड़े न हैं?

आशा है कि इन विज्ञानं स्वीकृत और संस्कृति से जुड़े बातों का खंडन करके मज़ा आया होगा. यह लिखते लिखते मेरे चाय का कप और पकोड़े का प्लेट ख़ाली हो चुके हैं और मैं चला कुछ खाने.


आपका साथी फिटनेस एक्सपर्ट



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