देश की बात, देश के साथ – ग्राउंड रिपोर्ट 2019 (लखनऊ, U.P)

लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश की कितनी महत्ता है इसका अंदाजा इस बात से ही लगा सकते हैं कि अक्सर यह कहा जाता है “चुनावी गलियारे में दिल्ली का रास्ता उत्तरप्रदेश से हो कर ही गुजरता है.” 2014 में हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ‘लहर’ के माध्यम से 80 में से 71 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. जबकि राज्य की तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी समाजवादी पार्टी को 5 व कांग्रेस व अपना दल को 2-2 सीटों से संतुष्ट होना पड़ा था. वहीं बहुजन समाज पार्टी को मुँह की खानी पड़ी थी और उसे एक भी सीट नहीं मिली.

नवाबों का शहर राजधानी लखनऊ में यूँ तो सियासी खींचतान बहुत होती है किन्तु लोकसभा चुनावों में लगभग तीन दशकों से यहाँ खींचतान का कोई भी प्रभाव नहीं दिखा. 1991 से अब तक यहाँ सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही जीत हासिल करती आ रही है. पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल जी की कर्मभूमि कही जाने वाली लखनऊ सीट पहली बार 1991 में भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में आयी. अटल जी यहाँ से लगातार पाँच बार सांसद चुने गए. अटल जी के राजनीतिक जीवन से दूर होने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से ही लालजी टंडन ने यहाँ जीत दर्ज की. आरंभ से ही यह सीट सामान्य सीट ही रही है. 

इतिहास के जाएं तो 1967 में हुए आमचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार आनंद नारायण ने जीत दर्ज की.  1971 में हुए आमचुनाव में कांग्रेस की शीला कौल और 1977 हेमवती नंदन बहुगुणा भारतीय लोकदल के टिकट से जीतकर लोकसभा पहुंचे. 1980 और 1984 में कांग्रेस की टिकट पर शीला कौल ने लगातार दो बार जीत हासिल की. लखनऊ संसदीय सीट में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं. जिनमें लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ पूर्वी, लखनऊ मध्य व लखनऊ कैंट. इन सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी. उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी को 2,72,749 मतों से हराया था. लखनऊ सीट 2019 के चुनाव में अत्यधिक रोचक सीट है, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रीता बहुगुणा जोशी 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गयीं थीं और अब वो मौजूदा समय में योगी सरकार में मंत्री हैं. कहने के लिए तो लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित होता है किंतु स्थानीय मुद्दे कई बार राष्ट्रीय मुद्दों पर भारी पड़ जाते हैं. आम चुनाव 2014 विकास के मुद्दे में लड़ा गया था. लखनऊ का मुद्दा था रोजाना लगने वाला जाम, सुरक्षा, सड़क, बिजली पानी, आवास व अनियमित कॉलोनियों का नियमितीकरण.

लखनऊ में लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए सांसद राजनाथ सिंह जी ने गत वर्ष किसान पथ का शिलान्यास किया था, जो शीघ्र ही पूरा हो जाएगा. इसके कारण ही रिंग रोड पर लगने वाला जाम ख़त्म होगा. लखनऊ मे कई फ्लाईओवर को भी मंजूरी दी गई है, जिनमें से कुछ पर काम शुरू होना है व कुछ पर हो चुका है. शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भी कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. गोमती नदी की सफाई का मुद्दा भी सबसे अहम है. स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए मॉडर्न ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी काम तेजी से किया जा रहा है.

हमने लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के लोगों से जन चौपाल के माध्यम से वहाँ के मुद्दों व विकास कार्यों के विषय में जानने की कोशिश की जहाँ हमें यह ज्ञात हुआ कि राजनाथ सिंह जी ने कार्य तो किया है. जनता से हमने पूंछा गठबंधन पर उनकी राय क्या है तो लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा; “जब ये लोग जान चुके हैं कि हमारी सरकार बननी नहीं है तो गठबंधन तो करेंगे ही करेंगे, धीरे-धीरे सब मिल रहे हैं. जानते हैं कि भाजपा उनके ऊपर भारी पड़ रही है.” अगले प्रश्न के रूप में जनचौपाल में मौजूद युवाओं से रोजगार के विषय में प्रश्न किया गया जिसमें हमें जो जवाब मिला कि रोजगार की स्थिति तो ठीक है, आदमी समझ सके तो उसे बताना चाहते हैं कि आज आदमी इतना टैलेंटेड है कि कुछ भी काम कर सकता है. सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते कि वो हमें नौकरी दे आकर. प्राइवेट सेक्टर में बहुत नौकरियां निकल रही हैं.

लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह जी के कार्यों के विषय में लोगों ने कहा कि अच्छा काम किया है, पुल पास हुए हैं जो जाम से बचाएंगे, स्ट्रीट लाइट लगाई गयीं हैं, सड़कों का निर्माण हुआ है. जीएसटी जिसे विपक्ष लगातार गलत ठहरा रहा है, पर जनता ने कहा इससे हमें कोई भी फ़र्क़ नहीं पड़ा है, बल्कि यह अच्छा ही है.राफेल पर आम जनता का रुख भी स्पष्ट ही है, क्योंकि यहाँ राफेल मुद्दे पर सवाल किए जाने पर जवाब मिला कि इससे लोकसभा चुनाव में कोई भी फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. इसी मुद्दे पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला काम है, इस मुद्दे को केवल बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा रहा है. जनचौपाल में जब राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ पर जनता ने कहा कि राहुल गांधी को खुद ही नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं.

नोटबन्दी पर प्रश्न किए जाने पर आम जनता ने कहा कि कुछ तो परेशानी हुई ही, लेकिन इसमें कुछ अच्छा ही हुआ. हमारा अगला प्रश्न था कि क्या राजनाथ सिंह जी इस बार सीट निकाल लेंगें तब दो टूक शब्दों में एक महाशय ने कहा कि निकाल लेंगें. कुछ अन्य प्रश्नों का जवाब देते हुए जनता ने कहा कि पिछले पाँच सालों में लखनऊ में बदलाव नहीं हुए है, ट्रैफिक में काम तो हुआ है पर यह काफी नहीं है. लोगों से सुरक्षा के विषय में पूंछा गया कि क्या क्राइम कम हुआ है, तब उत्तर मिला कि हाँ कम तो हुआ ही है. एक अन्य व्यक्ति से लोकसभा चुनाव के विषय में पूछा गया तो जवाब मिला कि देश में भाजपा नम्बर वन है लेकिन लखनऊ में तो सपा का चल रहा है. इसी प्रश्न पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि महागठबंधन की 50-55 सीट आएंगीं.

क्या मोदी जी फिर से प्रधानमंत्री बन पाएंगें, पूछने पर जनता से जवाब मिला कि हां निश्चित ही बन पाएंगें. जनता से उनकी सबसे बड़ी समस्या के विषय में पूंछे जाने पर जनता ने कहा कि यहाँ पानी और ट्रैफिक बड़ी समस्या है.

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