दुर्योधन की डायरी – शांतिपुरुष

  • महाभारत का तेरहवाँ दिन;
  • दुशासन, जयद्रथ और दुशासन-पुत्र द्रुमसेना ने अभिमन्यु को मारा.

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  • महाभारत का चौदहवाँ दिन;
  • भीम ने द्रुमसेना को मार डाला.

पंद्रहवें दिन संध्या बेला दिन का युद्ध समाप्ति के पश्चात दुशासन ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स बुलाई. पत्रकार जब आ गए और दही वाले शरबत की चुस्की लेना शुरू किए तो दुशासन बोला; “मैंने आपको बुलाया क्योंकि मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैंने अपना बड़ा हृदय खोल दिया है और अब मैं पांडवों को शांति प्रस्ताव भेजता हूँ. महान बुद्धिजीवियों ने आज ही मुझे बताया कि युद्ध से आजतक किसी का भला नहीं हुआ”

एक पत्रकार ने पूछा; “परंतु आपने ही देवी द्रौपदी का अपमान किया था और भीम को मारने का षड्यंत्र किया था. फिर यह हृदय परिवर्तन कैसे?”

दुशासन बोला; “अब मैं स्टेट्समैन कहलाना चाहता हूँ. चौदह दिन युद्ध लड़कर मुझे यही समझ आया कि युद्ध एक निरर्थक बात है. वैसे मैं डरता नहीं क्योंकि मेरे पास अस्त्र-शस्त्र है लेकिन मैं मानता हूँ कि अब भीम को भी अपना हृदय विशाल खोल देना चाहिए और मुझे मारने की अपनी प्रतिज्ञा भूल जानी चाहिए”

केशव और दाऊ प्रेस कॉन्फ़्रेन्स टीवी पर देख रहे थे. केशव मुस्कुराते हुए बोले; “मृत्यु सर पर तो बुद्धि खुलना आश्चर्य की बात नहीं”

दाऊ बोले; “देखा कान्हा, मैं न कहता था कि दुर्योधन और दुशासन बुरे नहीं हैं. बस कभी-कभी अपराध कर बैठते हैं. आज दुशासन ने यह प्रेस कॉन्फ़्रेन्स करके शांति का जो संदेश दिया है उसका अब युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम द्वारा स्वागत होना चाहिए”

दूसरे दिन सुबह चहचह डॉट कॉम, तार डॉट कॉम, मुद्रण डॉट कॉम वग़ैरह पर दुशासन को द्वापर युग का सबसे बड़ा शांतिपुरुष बताया जा रहा था.

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  • महाभारत का सत्रहवाँ दिन;
  • भीम ने दुशासन की भुजा उखाड़कर…….
CA & Blogger @shivkmishr

2 Comments

  1. Vineet Tayal
    March 5, 2019 - 8:47 am

    उत्तम अति उत्तम आज के संदर्भ में बिल्कुल सटीक महाभारत और केशव कभी भी अप्रसांगिक नहीं थे और ना कभी रहेंगे.

  2. Bitta Jain
    March 5, 2019 - 2:15 pm

    वर्तमान परिस्थति पर बहुत ही शानदार व्यंग़ 👍👍👍

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