सोवियत यूनियन के बिखराव के अनेक कारणों में से एक उसका ‘जंगी जुनून’ भी था. सोवियत यूनियन ने अपना रक्षा बजट इतना बढ़ा दिया था कि जनता की दैनिक दिनचर्या पर इसका स्पष्ट असर देखने को मिलने लगा. ‘गन्स एट दी कॉस्ट ऑफ बटर’ वाला सिद्धांत पूरी तरह से अपना लिया गया. तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन इन परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ गए थे कि सोवियत यूनियन का यह पागलपन आंतरिक रूप से उसे तोड़कर रख देगा. हुआ भी वही. युद्ध की जिस आग को भड़काकर सोवियत यूनियन का नेतृत्व अपनी पीठ थपथपा रहा था, उसी आग में उनका भविष्य भी स्वाहा हो गया.
आज हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान की भी यही स्थिति बनी हुई है. पाकिस्तान मुश्किल आर्थिक रूप चुनौतियों से घिरा हुआ है. भुगतान करने में असमर्थ रहने के कारण बाजार में देश की साख गिर रही है. हर बीतता हुआ दिन उस देश के लिए और कर्ज़ का बोझ ले कर आता है. विदेशी निवेश की कमी और फॉरेन रिज़र्व में भारी गिरावट पाकिस्तानी हुक्मरानों की कुर्सी हिलाने के लिए पर्याप्त है. कुछ पाकिस्तानी नीति नियंताओं का कहना है कि बाज़ार आने वाले समय में इसको अपने आप ठीक कर देगा. लेकिन वह बाजार के इसी मूलभूत सिद्धांत को दरकिनार कर रहे हैं.
दूसरी तरफ पाकिस्तानी बाज़ार का खस्ता हाल वहां के व्यापारियों की सहनशीलता की भी परीक्षा ले रहा है. बचा हुआ काम भारत द्वारा लगाया गया 200% टैक्स कर गया, जिसने पाकिस्तान के टमाटरों की लालिमा को इतना बढ़ा दिया कि अब फर्क करना मुश्किल हो रहा है कि ज़्यादा लाल क्या है, टमाटर या पाकिस्तानी अवाम का चेहरा. फिर भी पाकिस्तान का जंगी जनून जेहादी जद्दोजहद से लबरेज है. 1948, 1965, 1971, 1999 और ना जाने कितनी बार सीमा रेखा की मर्यादा लांघने वाला पाकिस्तान आज अपने सदन में एक ऐसे नेता को भी सुन रहा है जो कहता है कि जो मुसलमान जिहाद नहीं करता, वो मुसलमान है ही नहीं. धार्मिक कट्टरता ने पाकिस्तान के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है.
पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों बताती हैं कि देश अंदर से कितना खोखला होता जा रहा है. पिछले दिनों पाकिस्तान के एक नेता ने तिलिस्मी उपाय सुझाते हुए पाकिस्तानी सरकार से यह पूछ दिया था कि आखिर पाकिस्तान क्यों बाहर से पनीर का आयात कर रहा है. क्या गरीबी और मुफलिसी में जी रही पाकिस्तानी आवाम पनीर अफॉर्ड कर पाएगी? उनका कहना था कि पाकिस्तान का रक्षा बजट बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते हुए बजट की तुलना में पाकिस्तान का रक्षा बजट बहुत कम है. उनके अनुसार खर्चों में कटौती के लिए पाकिस्तान की अवाम की थाली से पनीर छीन ली जानी चाहिए क्योंकि मुल्क खतरे में है, कौम खतरे में है. ऐसा ही कुछ पाकिस्तान के अन्य नेताओं का भी मत है. लेकिन क्या मुल्क के लिए सारी कुर्बानी देने की ‘ड्यूटी’ सिर्फ पाकिस्तानी अवाम की ही है?
पाकिस्तानी राजनीति में भ्रष्टाचार की गहराई का अंदाज़ा आप इसी से लगा लीजिये कि नवाज़ ‘पनामा’ शरीफ तो आज भी गालियां खा रहे हैं. पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में बढ़ता हुआ ‘डेफिसिट’ पाकिस्तान को एक आर्थिक इमरजेंसी की तरफ ले जा रहा है. इसका भी एक उपाय पाकिस्तानी नीति नियंताओं ने ‘ज़्यादा पैसे छाप’ कर निकाला. इस उपाय ने पाकिस्तानी अवाम की ‘पर्चेसिंग पॉवर’ को और कम कर दिया. इसका असर भी पाकिस्तानी बाजारों पर साफ देखा गया.
अब पाकिस्तानी जंगी जुनून ने भारत की मिलिट्री इंस्टालेशन पर असफल हमला कर पाकिस्तान को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. वैश्विक राजनीति के शब्दकोष में यह ‘एक्ट ऑफ वॉर’ है. भले ही इमरान खान ‘पीस जेस्चर’ की बातें करें, लेकिन सब जानते हैं कि उनकी लगाम पाकिस्तानी सेना के जनरल बाजवा के हाथ है. इन सबके बीच पाकिस्तानी अवाम को उसकी मीडिया द्वारा पूरा वैचारिक खाद पानी दिया जा रहा है. पाकिस्तानी अवाम ‘हिंदुस्तान को सबक सिखाओ’ चिल्ला रही है. टमाटर का तोड़ दही में निकालने को मजबूर पालिस्तानी अवाम अभी भी जिहादी मानसिकता से उबर नहीं पाई है. जहां खाने के लाले पड़े हुए हैं, वहां बारूद की खेती की जा रही है.
कुछ पाकिस्तानी विशेषज्ञों की मानें तो नरेंद्र मोदी वही काम पाकिस्तान के साथ कर रहे हैं, जो रोनाल्ड रीगन ने सोवियत यूनियन के साथ किया था लेकिन पाकिस्तानी नेतृत्व इस बात को समझ ही नहीं पा रहा है. ‘मंदिरों के घण्टे’ बंद कराने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों का ‘जंगी जुनून’ मोदी के सख्त इरादों को और मज़बूत कर रहा है. पाकिस्तान एक ‘वेलफेयर स्टेट’ की जगह एक ‘वॉर-फेयर स्टेट’ बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है. यदि वे नहीं रुके तो दूसरी बार पाकिस्तान के टुकड़े हो सकते हैं. उनको अपने मुल्क के अंदर के ही मसाइल समझ में नहीं आ रहे हैं.
कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को पिछले पांच साल में भारत ने दुनिया से अलग थलग कर दिया है. पुलवामा हमले के बाद अमेरिका सहित समूचे विश्व ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया. भारत ने पाकिस्तान के हाथ से सऊदी को लगभग छीन लिया है. चीन तक ने पाकिस्तान से पल्ला झाड़ लिया है. हद तो तब हो गयी जब OIC में भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया. इन सबके बीच भी भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तानी घमंड को हवा दे रही है.
पाकिस्तान खुद ही अपनी बर्बादी की पटकथा लिख रहा है. जब ऊपरवाला किसी को बर्बाद करने का मन बनाता है तो सबसे पहले उसकी बुद्धि छीन लेता है. पाकिस्तानी हुक्मरानों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. पाकिस्तान को इस समय यह समझ नहीं आ रहा है कि उसकी अवाम के अंदर ही एक अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है.
जंग के मुहाने पर खड़े पाकिस्तान के लिए बेहतर यही होगा कि वह अपने होश में आए – ‘लर्न फ्रॉम हिस्ट्री बिफोर यू बिकम ए हिस्ट्री’.

1 Comment
Lekin ek Bhartiya aawam k kuch log h ,
Wo yoddh se dar rahe h ,
Unhe dar h k agar Yudh hua to daily use k vastuye mahgi ho jayegi .
Unhe apna comfort shayad Desh se pyara h ,
Wo shayad Apne gauravsheel itihas Ko bhul chuke h .
Shayad unki aankho k Paani mar Chuka h ,
Unhone Apne Emman Ko jinda jala diya h ,
Ap sirf Bhagwan h aise logo k madad kar Sakta h .