ओडिशा के पांचवें बड़े जिले का नाम है सुंदरगढ़. जो कि ओडिशा की एक लोकसभा सीट है. सुंदरगढ़ लोकसभा सीट जो अपने नाम के अनुसार सुंदर है, यहाँ प्रकृति ने अपनी अनुपम छटा बिखेरने का काम किया है. यह ओडिशा की वही एकमात्र सीट है जहाँ पिछले आम चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी. आदिवासी समुदाय की बहुलता की वजह से यह सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है.
प्राकृतिक सुंदरता के अतिरिक्त प्रकृति ने सुंदरगढ़ को खनिज भी भरपूर प्रदान किया है. यहां लौह अयस्क, लाइमस्टोन और मैगनीज़ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. जिस वजह से यहाँ स्लीट प्लांट, फर्टिलाइजर प्लांट और सीमेंट की फैक्ट्रियां हैं. हालांकि यहाँ प्लांट व फैक्ट्रियां हैं लेकिन यहाँ का युवा आज भी बेरोजगारी का दंश झेल रहा है व खेती करके रोजी-रोटी चला रहा है.
ओडिशा की इस हाई प्रोफाइल सीट में बीजेपी नेता जुएल ओरांव सांसद हैं, चूंकि ओरांव ओडिशा से एकमात्र विजयी भाजपा प्रत्याशी थे इसलिए उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया. इस सीट का इतिहास रोचक रहा है, कभी कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले सुंदरगढ़ में आज भाजपा का कब्ज़ा है. इस सीट में जनता दल व स्वतंत्र पार्टी को भी जीत हासिल हुई है लेकिन सत्ताधारी पार्टी बीजद कभी भी नहीं जीत सकी है.
वर्तमान सांसद जुएल ओरांव यहाँ 1998 से 2009 तक विधायक विधायक रहे, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता हेमानंद विस्वाल के हाथों इन्हे लगभग साढ़े ग्यारह हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा. हालांकि कांग्रेस यहाँ भाजपा को सत्ता से ज्यादा दिन दूर नहीं रख सकी, क्योंकि 2014 लोकसभा चुनाव में जुएल ओरांव ने एक बार फिर जीत प्राप्त की. यह जीत अधिक अंतर से नहीं थी, क्योंकि जुएल ओरांव 18829 वोटों से ही जीते थे.
सुंदरगढ़ लोकसभा क्षेत्र की विधानसभाओं के विषय में चर्चा की जाए तो यहाँ 7 विधानसभा क्षेत्र हैं, जो कि सुंदरगढ़, तलसारा, राजगांगपुर, बिरमित्रापुर, राउरकेला, रघुनाथपाली और बोनाई हैं. 2014 में हुए ओडिशा विधानसभा चुनाव में इन सीटों में से सुंदरगढ़ और तलसारा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की. जबकि बिरमित्रापुर सीट पर समता क्रांति दल ने कब्जा किया था. बोनाई सीट पर सीपीएम के कैंडिडेट को जीत हासिल हुई. वहीं रघुनाथपाली और राजगांगपुर सीट में बीजू जनता दल ने परचम लहराया. ओडिशा के तीसरे बड़े शहर राउरकेला सीट को बीजेपी ने जीता था.
यहाँ के वोटर्स की सबसे बड़ी समस्या शिक्षा व रोजगार है. आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में शिक्षा का स्तर कमजोर है. यहाँ कि आधी से अधिक आबादी अशिक्षित है जबकि यहाँ के कॉलेज में शिक्षकों की कमी का मुद्दा विधानसभा में भी उठा था. रोजगार की बात करें तो राउरकेला स्टील प्लांट व सीमेंट फैक्ट्री के अलावा राजगांगपुर की सीमेंट फैक्ट्री में भी यहाँ के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि जितने प्राप्त होने चाहिए थे उससे कहीं कम ही प्राप्त हुए हैं.
सुंदरगढ़ लोकसभा क्षेत्र द्वारा राज्य सरकार को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है, किन्तु जिस तरीके से सरकार को यहाँ पर काम करना चाहिए था वह नहीं किया गया है. पर्यटन के लिएयहाँ पर्याप्त साधन हैं. यदि सरकार चाहे तो पर्यटन स्थलों की स्थिति में सुधार कर यहाँ रोजगार के अच्छे अवसर प्रदान कर सकती है.
यह सीट सभी दलों के लिए महत्वपूर्ण है, कांग्रेस यहाँ वापस आनी चाहती है तो बीजद पहली बार जीत के लिए लड़ाई लड़ेगी. भाजपा से वर्तमान सांसद जुएल ओरांव सुंदरगढ़ से चार बार सांसद रह चुके हैं, तो बीजेपी भी इस सीट को बचाने के लिए जद्दोजहद ज़रूर करेगी.
